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ग्रामीन आज भी पानी के लिए संघर्षरत: दूसरी तरफ PHE विभाग की औपचारिकता 

कुछ समय पहले, जब ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत को लेकर प्रादेशिक युवा आवाज में खबर प्रकाशित हुई थीं, तो PHE (लोक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग) विभाग ने आनन-फानन में पारंपरिक पुराने कुओं के पानी का निरीक्षण कर अपनी ‘औपचारिकता’ पूरी कर ली थी। हालांकि, आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।

खबर का सार:

पहले प्रकाशित खबर में गांवों में पानी की गंभीर समस्या को उजागर किया गया था। बताया गया था कि कैसे ग्रामीण महिलाएं दूर-दराज के इलाकों से सिर पर घड़े रखकर पानी लाने को मजबूर हैं, और कैसे पानी की कमी से उनकी दैनिक दिनचर्या और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इस खबर के बाद PHE विभाग हरकत में आया और ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया कि जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।

PHE विभाग का ‘निरीक्षण’:

विभाग ने आश्वासन के बाद, पारंपरिक पुराने कुएं का निरीक्षण किया। यह निरीक्षण महज एक औपचारिकता बनकर रह गया। विभाग ने पानी की गुणवत्ता की जांच की और लेकिन रिपोर्ट कुछ तैयार नहीं कीं। ग्रामीणों का कहना है कि इस निरीक्षण से उनकी समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। कुएं से आज भी वही पानी पीने को मजबूर है, और जो पानी उपलब्ध है, उसकी गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है।

आज भी वही संघर्ष:

आज भी ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। महिलाएं और बच्चे पानी के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करते हैं। हैंडपंप सूखे पड़े हैं और जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। सरकार की नल-जल योजनाएं भी कई गांवों में अधूरी पड़ी हैं, तो कही काम हो शुरू नहीं हुआ है जहां पाइपलाइन डाली गई वहां चालू नहीं हुआ है।

ग्रामीणों की व्यथा:

बेलेडी के इस कुएं से पानी भरने वाली महिलाओं, ने बताया, “हमें उम्मीद थी कि खबर छपने के बाद सरकार हमारी सुध लेगी, लेकिन PHE विभाग ने सिर्फ दिखावा किया। आज भी हमें दूर से पानी लाना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है क्योंकि उन्हें भी पानी लाने में मदद करनी पड़ती है।”

एक अन्य ग्रामीण ने कहा, “पुराने कुओं का निरीक्षण करने से क्या होगा? वो तो काफी पुराने और जर्जर हो ही चुके है। सरकार को चाहिए कि नए जल स्रोत विकसित करे या फिर पुरानी योजनाओं को दुरुस्त करे।”

आवश्यकता स्थायी समाधान की:

ग्रामीणों की मांग है कि सरकार और PHE विभाग सिर्फ औपचारिकता न निभाएं, बल्कि पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकाले। इसमें नए हैंडपंप या ट्यूबवेल लगाया जाए, जल संचयन योजनाओं को बढ़ावा देना, पाइपलाइन बिछाना और मौजूदा जल स्रोतों का रखरखाव शामिल है। जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, ग्रामीण इसी तरह पानी के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

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