झाबुआ – झाबुआ जिले में आदिवासी अधिकारों की रक्षा, अवैध शराब व्यापार पर रोक, अधूरी सड़क परियोजनाओं के पुनः आरंभ और गैर-कानूनी खनिज नीलामी को रद्द करवाने की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने विशाल धरना प्रदर्शन कर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल, प्रदेश सचिव माथिहास भूरिया, एवं जिला अध्यक्ष विनय भाबोर ने किया। सैकड़ों ग्रामीणजन एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
प्रमुख मांगें एवं मुद्दे निम्नलिखित रहे:
1. जिले में अवैध शराब व्यापार का जाल – झाबुआ के गांव-गांव में शराब माफिया द्वारा आबकारी विभाग की मिलीभगत से अवैध शराब की आपूर्ति की जा रही है। रातभर शराब की पेटियां चार पहिया वाहनों से गुजरात तक भेजी जा रही हैं। आबकारी विभाग, पुलिस और शराब ठेकेदारों की मिलीभगत से क्षेत्र में अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
2. स्थानीय रोजगार की उपेक्षा – जिले की शराब दुकानों पर बाहरी राज्यों (उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड) से आए श्रमिक कार्यरत हैं जबकि स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं दिया जा रहा। कई बाहरी व्यक्तियों पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं।

3. सड़क निर्माण में लापरवाही – राजगढ़-पारा-पिटोल मार्ग का निर्माण कार्य वर्षों से लंबित है, जबकि इसके लिए 119.51 करोड़ की राशि वर्ष 2016 में स्वीकृत हुई थी। पेड़ काटने और कार्य प्रारंभ करने के बाद भी कार्य अचानक रोक दिया गया, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
4. खनिज नीलामी पर संवैधानिक उल्लंघन – मेघनगर क्षेत्र में बिना ग्रामसभा की सहमति के ग्रेफाइट व मैग्नाइट खनिज ब्लॉकों की नीलामी की जा रही है। पेसा एक्ट 1996, म.प्र. पेसा नियम 2022, तथा भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची का घोर उल्लंघन किया गया है।

5. प्राकृतिक संसाधनों एवं पर्यावरण पर खतरा – आदिवासी क्षेत्रों में हो रहे खनन कार्यों से जंगल, जलस्त्रोत, जैव विविधता, धार्मिक आस्था स्थल (बाबा देव आदि) एवं पारंपरिक जीवन शैली को गंभीर खतरा है। स्थानीय नदियों में फैक्ट्रियों के केमिकल डंप किए जा रहे हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है।
6. संविधान और आदिवासी स्वशासन का उल्लंघन – खनिज सर्वे और नीलामी की प्रक्रियाएं ग्रामसभा की सहमति के बिना की जा रही हैं, जो संविधान की धारा 244(1), भू-राजस्व संहिता की धारा 165(5)(6) और धारा 170 का उल्लंघन है।

7. पूरे जिले में पूर्ण शराबबंदी की मांग – स्व. दिलीप सिंह भूरिया के सपनों को साकार करने और आदिवासी समाज को सम्मान देने के लिए संपूर्ण झाबुआ जिले में पेसा एक्ट के तहत शराबबंदी लागू की जाए।
चेतावनी: यदि 15 दिवस के भीतर इन सभी मांगों पर शासन-प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं की जाती है, तो सर्व आदिवासी समाज उग्र आंदोलन एवं चक्का जाम करने को बाध्य होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।