झाबुआ। सरकारी तंत्र खोखला नजर आने लगा है… चंद गांधीछापों के चक्कर में अपना ईमान बेचने में कोई कसर नही छोडता है ये सरकारी तंत्र.. अब देखो ना…. सरकारी भूमि पर अब भू माफियाओं की नजर गढने लगी है… और इस भू माफियाओं को सरकारी तंत्र ही संरक्षण देता आ रहा है…।
जी हां हम बात कर रहे है मेघनगर स्थित सर्वे नम्बर 557 कि जो अखाडे के पास बडी बेशकीमती जमीन है… जिस पर भू माफिया जो नशे व केमिकल बनाने वाली फैक्ट्रियों को संरक्षण देता आ रहा है… ये वहीं माफिया है जो इन दिनों भाजपा जिलाध्यक्ष बनने के सपने देख रहा है… वही सर्वे नम्बर 557 की भूमि का मास्टर मांइड है… जिसने अपने गुर्गे को आगे कर सरकारी तंत्र को चंद गांधीछापों में खरीद लिया है… इस भूमि पर अवैध अतिक्रमण की शिकायत वर्ष 2013 से सतत् की जा रही है… हर बार जांच हुई… और जांच में पाया गया कि उक्त भूमि शासकीय है… अधिकारी बदलते गए और जांच में नए नए रूप आते गये… अब सोचिये ना आप 2021 में शिकायत करता ने शिकायत की… उसकी जांच में 3 साल लग गए और जांच प्रतिवेदन 19 .11.2024 को पेश किया गया… जिसमें स्पष्ट लिखा सर्वे नम्बर 557 रकबा 1.6350 हैक्टीयर विकास खंड नजूल शासकीय मद में दर्ज है और 2013 में हुई शिकायत के बाद जो पत्र शिकायत कर्ता को प्राप्त हुआ उसका भी हवाला दिया गया। अब आप ही सोचिये माफिया द्वारा किस तरह से सरकारी तंत्र को अपनी गिरफत में लेकर सर्वे नम्बर 557 का क्या खेल खेला होगा… या फिर यूं भी कह सकते है… भाजपा के राज में सरकारी तंत्र को दबाया भी गया हो कुछ कह नही सकते।
मेघनगर का ये भू माफिया.. भारतीय जनता पार्टी की आड में ये सारे खेल खेल रहा है… भाजपा की सरकार है… ऐसे में सरकार से कौन भीड सकता है… तभी तो ये माफिया… भाजपा की आड में हर खेल खेल रहा है… चाहे वो नशे की फैक्ट्री संरक्षण देना हो या फिर नाले में केमिकल वाले पानी को बहाना हो…. सारे खेल यही खेल रहा है। सुना है ये भाजपा जिलाध्यक्ष बनने के सपने संजोये बैठा है… अगर ये भाजपा जिलाध्यक्ष बन गए जो आने वाले समय में क्या होगा… अब तो ये भाजपा आलाकमान को देखना है… कि ऐसे व्यक्ति को भाजपा जिलाध्यक्ष बनाती है… या फिर किसी और को… शर्म तो उन्हे आनी चाहिए जो भाजपा के बडे पदों पर बैठे है… और मातृ संगठन से जुडे होने के बाद भी ऐसे माफिया संरक्षण देते है….।