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रात 12 बजे कड़कड़ाती ठंड में  मजदूर बस की तलाश में सड़को पर ठिठुरते आये नज़र….!  सिस्टम का शिकार मजदूर,झेल रहा पलायन का दंश..?

रिपोर्टर-सुनील खोड़े

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पेटलावद। जहां एक और प्रदेश सरकार आदिवासी बाहुल्य जिले में तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित कर आम जनता को मुख्य धारा से जोड़ने का काम कर रही है। वही ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर योजनाओं के साथ-साथ रोजगार मुहैया करवाने का दावा भी किया गया ताकि मजदूर वर्ग को स्थानिय स्तर पर ही रोजगार मिल जाए ओर पलायन का दंश ना झेलना पड़े इसी को लेकर तत्कालीन रहे प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंचायत स्तर पर चलने वाले सरकारी निर्माण कार्यों में गांव के मजदूर वर्ग की सहभागिता मजदूरी के रूप में देने की बात कही थी। हर एक गरीब मजदूर वर्ग के मजदूरों को सो दिवस का रोजगार उपलब्ध करवाने की अनिवार्यता की गई थी परंतु आज हालात इस बाहुल्य जिले में ये हो गए हैं कि पंचायत स्तर पर चलने वाले सरकारी निर्माण कार्यों में मजदूरों की जगह मशीनों से निर्माण कार्य करवाए जाते हैं। और मजदूरों के हक अधिकार पर सीधे डाका डाला जा रहा है। आज सिस्टम का शिकार मजदूर वर्ग पलायन का दंश झेल रहा है। अंधेरी नगरी चौपट राजा की तर्ज पर सरकारी निर्माण कार्य संचालित किये जा रहे हैं। यही मुख्य वजह है जिले में पलायन बदस्तूर जारी है इसे रोक पाने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है धरातल पर कोई योजनाएं प्रशासन द्वारा नहीं बनाई गई जिससे पलायन पर रोक लगे और स्थानीय स्तर पर मजदूर वर्ग को रोजगार मिल सके. वैसे तो पलायन के आगोश में पूरा जिला ही है परंतु एक ऐसा मामला या यूं कहै की एक ऐसा दृश्य वाक्य देखने को मिला जो निश्चित ही रोंगटे खड़े करने वाला और गरीबी किसको कहते हैं दोजून की रोटी कमाना कैसा होता है।

मजदूर वर्ग को किन मुसीबत के बीच गुजर कर अपने मुकाम पर पहुंचना होता है यह पीड़ा मजदूर ही जाने बीती रात 12:00 बजे के लगभग ऐसा ही दृश्य देखने को मिला जहां पर एक मजदूर परिवार गुजरात की ओर मजदूरी करने जा रहा था इस कड़कड़ाती ठंड पिता के हाथों में इन मासूम नोनिहाल बच्चा भी था जिसे गरीब मजदूर पिता ठंड से बचाने के लिए अपने बच्चों को अपने सीने से लगाए हुए वही उस नोनिहाल बच्चे की मां जहां पर खाने-पीने का राशन की कुछ गाठ बंधे ठेलो कि निगरानी करते हुए क्या बोले ग्रामीण-” स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिल पा रहा है, जिस वजह से हमें अन्य राज्यों में जाकर मजदूरी करना पड़ती है। रात्रि में चलने वाली बसों के माध्यम से हम अहमदाबाद पहुंचेंगे जहां ₹500 प्रति व्यक्ति के अनुसार हमें मजदूरी दी जाएगी। पलायन पर हम हमारे साथ छोटे बच्चो को लेकर जा रहे है – बलवान भाभर, ग्रामीण।

“मजदूरी की तलाश में हमें गुजरात राज्य में जाना पड़ रहा है। ठंड का मौसम है काफी परेशानियों के बीच हमें पलायन पर जाना पड़ता है। हमारे साथ हमारा मासूम बच्चा भी है जो कि अभी आठ माह का है। उसे हम साथ में लेकर जा रहे हैं मजबूरी के कारण हमें पलायन करना पड़ रहा है – पवित्रा बाई, ग्रामीण””

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