झाबुआ। अरे भियाँ यहाँ तो ये कहावत चरितार्थ हो गई खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे.. ये मैं नहीं नगर की जनता कह रही है.. घटिया ओर गुणवत्ताहीन सड़क बना कर ऊपर पॉवडर डालने से कोई सड़क पक्की नहीं हो जाती.. जो बनते ही उखाड़ने लगे.. ये जनता की गाडी कमाई का पैसा है जो जनता टैक्स के माध्यम से चुकाती है। अगर झूट बोल रहा हूँ तो अभी के अभी जॉच करवा लो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा।
अब भियाँ बात है नगर पालिका की बदनामी की तो वो तो फाकू ठेकेदार के रिया है 20 प्रतिशत कमीशन दिया है.. तो सड़क ऐसी ही बनेगी एक एक पार्षद को कमीशन बटा है नगर पालिका को काम से पहले कमीशन दिया है.. ये तो सारे पार्षदों का अपमान है.. पहली परिषद है जो आपसी सामंजस्य बनाकर काम कर रही है.. वरिष्ठ, पुराने और सभी सम्मानित पार्षद है इस परिषद में विजय चौहान पर्वत मकवाना पुराने समय से नगर पालिका का ज्ञान है जो समय समय पर सभी को मार्गदर्शित भी करते है.. महेंद्र तिवारी इंजीनियर रह चुके है उन्हें निर्माण कार्यों का भी अच्छा ज्ञान है.. ऐसे में बीस प्रतिशत कमीशन देने की जो अफ़वाह उड़ाई जा रही है वो पार्षदों का अपमान है.. अब पोल खुली तो खिसियानी बिल्ली की तरह खम्भा नोचोगे तो सब जानते की असलियत क्या है.. अब भ्रष्टाचार उजागर हो गया तो कपड़े फाड़ना अच्छी बात नहीं है.. अब ना तो में गोवा गया और ना ही मुझे जुआ खेलते आता है.. ये तो नगर की जनता कह रही है सड़क का निर्माण घाटियाँ हुआ है तो हुआ है.. अभी के अभी केना था तो के दिया। मैं फ़ाकता नहीं जो केता हूँ सीधे के सीधे देता हूँ.. अब भियाँ पोल खोल दी ने तो भागते फिरोगे.. में भी दूसरों की तरह नहीं हूँ..