रिपोर्टर-सुनील खोड़े
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पेटलावद ।सूर्य चंद्रमा की कोई बराबरी नहीं होती है ,वैसे ही गुरुदेव पूज्य उमेश मुनि जी महाराज साहब की कोई बराबरी नहीं हो सकती ।जीवन भर अप्रमादी रहे ओर अपने अनुयायियों को भी ऐसा ही हो जाने की शिक्षा देते रहे। लोग ने उन्हे वर्तमान का वर्धमान कहा पंडित रत्न कहा आध्यात्मिक योगी कहा वचन सिद्ध कहा और भी न जाने कितनी उपमाऐं उन्हें दी गई। पर वह कभी फुले नहीं। सदैव महात्मा गांधी की सीख अपने को लघु मानो को साकार करते रहे। और अपना उपनाम अणु रख लिया। जीवन भर लघुता से प्रभुता की ओर बढ़ते रहे। उनकी कल्याणकारी छवि सब के हृदय में अंकित है। वे इसलिए प्रातः स्मरणीय बने क्योंकि वह इंद्रियों के दास नहीं बने ।कषायों को जीवन भर दूर रखा ।वाणी से अमृत बरसाते रहे ।जीवन सरलता से महकाते रहे। इंसान से भगवान बनने की रास्ते पर चलने की सीख जीवन भर देते रहे। जिस पर भी एक नजर पड़ जाती वह निहाल हो जाता था। दर्शन मात्र से कईयों के दारिद्र दूर हो गए। मान अपमान निंदा प्रशंसा में निर्लिप्त रहे। इसीलिए वह प्रातः स्मरणीय बने । यह हमारा सौभाग्य है कि इस मालवा भूमि जिसे महापुरुष कहते है कि मालवा चैतन्य हीरो की खदान है के निवासी है। उनका हमें सानिध्य मिला आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिला। उक्त बातें तीन दिवसीय अणु स्मृति दिवस के पहले दिन गुणानुवाद श्रृंखला को प्रारंभ करते हुए पेटलावद गौरव साध्वी श्री सुव्रता जी ने महती धर्म सभा को संबोधित करते हुए स्थानक भवन में कहे।
साध्वी श्री शिल्पा जी ने कहा मुझे गुरु देने वैराग्य काल में पांच हित शिक्षा दी कहा गुरु वह गुरुणी से कभी कोई बात छुपाना नहीं हमेशा खुली किताब की तरह रहना। दूसरी बात उन्होंने कही तप का अभिमान कभी मत करना। आगे कहा वैयावच मे सदैव तत्पर बने रहना। प्रतिकूलता को निर्जरा का अवसर मानना और अंत में उन्होंने कहा मनमुटाव हो जाए तो पानी पिए बगैर उसे क्षमा याचना करना। गुरु की हित शिक्षा से मैं अपना जीवन सार्थक कर रही हूं। आज आचार्य देव को 36 वंदना कर उन्हें आदरांजलि अर्पित की गई । सामूहिक एकासने के तेले प्रारंभ हुए प्रथम दिवस पर 151 से अधिक तपसियों ने भाग लिया। आज अजय मेहता के 29 व श्रीमती शिवानी जैन के 26 उपवास है। 100 से अधिक सामायिक के तले हुए। और 25 से ज्यादा संवर कि अठाठ्यीभी चल रही है ।सामूहिक एकासने की व्यवस्था श्री संघ द्वारा कुमकुम गार्डन पर रखी गई ।आज अमृतलाल अनिल कुमार मेहता परिवार की ओर से तपस्वियों के सम्मान में चौबीसी का आयोजन भी किया गया।