झाबुआ। पारा क्षेत्र जहां कई ऐसे व्यापारी है जो चोरी का माल खरीदते आ रहे है… इस क्षेत्र में कभी तेलंगाना, कभी छतीसगढ, कभी राजस्थान तो कभी महाराष्ट्र की पुलिस चोरी का माल बरामद करने आती ही है… कई व्यापारियों को यहां से उठाया भी है… जेल भी गए… विचारणिय बात तो यह है कि अन्य राज्यों का ये व्यापारी चोरी का माल खरीदते है तो जिले व आस पास के क्षेत्र व जिले में हुई चोरियों का माल क्या इनके पास नही आता होगा… पारा इतना भी बडा नही है कि यहां हर रोज लाखोें का सोना चांदी का माल बिकता होगा… सवाल तो यह भी उठता है… बहार की पुलिस आती है चली जाती है…. लेकिन स्थानीय व जिले की पुलिस को इन खरीददारों की खबर नही होती होगी क्या… क्या पुलिस के सुचना तंत्र की मामले में कमजोर है या फिर कर दिए गए? अगर पुलिस इस ओर ध्यान दे… तो एक कई बडी चोरियों और सरगनें के खुलासे हो सकते है… जनचर्चा है कि यहां पुलिस इन चोरी के माल खरीदने वालों से चाय पानी लेकर मामला रफा दफा कर देती है… किसी को पता भी नही चलता… शर्म की बात यह है बहार की पुलिस आकर कार्रवाई करती है तो झाबुआ पुलिस क्यों नही कर सकती। क्या खाकी चाय पानी के लिए पहनी गई है? पुलिस कार्रवाई करती है तो कॉलर पुलिस की ही उंची होगी… दुसरों की नही…. कई ऐसे खुलासे होंगे की आप सोच भी नही सकते… कई गुंडों…माफियाओं के भी चेहरें सामने आयेगे…! सुत्रों की माने तो कुछ चोरी का माल खरीदने वाले व्यापारी यह भी कहते हुए चौराहों पर नजर आये कि पुलिस को हडडी फेकों दुम हिलाते हुए आगे पीछे घुमते नजर आते है… क्या है काम करते है पैसा फेको तमाशा देखो! अब देखना यह है कि पुलिस इन पर लगाम कसती है या फिर चाय पानी में संतुष्ट हो जाती है।