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तप जीवन की सर्वश्रेष्ठ कलाओं में से एक है, साध्वी श्री सुव्रता जी 

रिपोर्टर-सुनील खोड़े

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पेटलावद । योद्धा युद्ध भूमि में तपकर विजय श्री दिलाता है। सूर्य आकाश में तप कर जगत में प्रकाश फैलता है। तपस्वी तप में तप कर कर्मों को खपा देता है। तप अस्थिर मन को स्थिर कर देता है। दुर्लभ लगने वाले कार्य को सुलभ बना देता है। जीवन में रिद्धि सिद्धि तप से आती है ।तप जीवन की सबसे सर्वश्रेष्ठ कलाओं में से एक है ।जो भी तपता है वह मूल्यवान हो जाता है। सोना आटा दूध मक्खन इसके आदर्श उदाहरण है। तप करने पर भले ही वर्तमान में कष्ट लगता हो पर भविष्य के लिए वह सुख कर ही बनता है। तप से शरीर क्षीण नहीं स्वस्थ बनता है आत्म बल बढ़ता है ।पूरे विश्व में उपवास औषधि के रूप में स्थापित हो चुका है । कल्पना बहन ने सिर्फ 11 उपवास करने का निश्चय किया था पर मासखमण कर आपने आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है।उक्त बात साध्वी श्री सुव्रता जी ने चातुर्मास का दूसरा मासखमण 30 उपवास से पूर्ण करने वाली श्रीमती कल्पना पारस सोलंकी के सम्मान में श्री संघ द्वारा आयोजित तप अभिनंदन समारोह में कहे ।

उनके सम्मान में जय कार यात्रा जय घोष की नारों के साथ सादगी पूर्ण तरीके से निकल गई ।तपस्वी का सम्मान पुत्री श्रीमती खुशबू रोहित कटकानी ने वर्षीय तप की बोली लेकर किया। प्रभावना सोलंकी परिवार की ओर से वितरित की गई। पुत्री खुशबू कटकानी ने माता के सम्मान में अपने उद्गार व्यक्त किए ।अभिनंदन पत्र उपाध्यक्ष महेंद्र कटकानी कोषाध्यक्ष विमल मोदी सचिव विनोद बाफना सह कोषाध्यक्ष संतोष गुजराती पूर्व अध्यक्ष अनोखी लाल मेहता नरेंद्र कटकानी पूर्व उपाध्यक्ष कांतिलाल झाड़मता सुरेश सोलंकी अशोक मेहता नवयुवक मंडल के अध्यक्ष अंकित मुरार महिला मंडल की अध्यक्ष श्रीमती आशा भंडारी बहू मंडल की अध्यक्ष श्रीमती संगीता मेहता सोहनलाल चाणोदीया रोहित कटकानी आभास सोलंकी आदि की उपस्थिति में प्रदान किया गया। संचालन व वाचन राजेंद्र कटकानी ने किया। आज श्रीमती खुशबू लौड़ा ने २७ उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किये।

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