कल यानी 16 अगस्त को भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की पूण्य तिथि थी,अटल बिहारी वाजपेई जी ऐसे प्रधामंत्री थे जिनके नेतृत्व में श्रीमती इंदिरा गांधी के बाद लगातार तीन बार पार्टी को जीत दिलाने वाले इकलौते प्रधानमंत्री का गौरव स्वः श्री वाजपेयी जी के नाम है,परंतु क्या करें…जिला भाजपा संगठन के पदाधिकारी उनकी त्याग और तपस्या को सब भूल गए है….उन्हें याद करने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को तो छोडो…वो तो सिर्फ झंडे तोकने के लिए है….वो तो उपेक्षा का शिकार है ही लेकिन भाजपा पदाधिकारियों ने जिला तो क्या मुख्यालय पर भी उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित नही किया,क्या जिले के पदाधिकारियों के पास उन्हें 2 मिनट का समय नही था क्या?आज जिन पदों पर मलाई चाट रहे है और मैं भी भावना ग्रसित हो गए है वो कभी भी धराशाई हो सकते है,क्योंकि जिस सत्ता की अकड दिखा रहे है वो अटल जी की त्याग तपस्या की देन है?क्या उस त्याग तपस्या को इतनी जल्दी भूल गए है जिला भाजपाई?इसे भूलना नही…सत्ता का नशा कहते है…जिसमें रहते हुए…भाजपाई ये भूल गए है कि आज वो जिस जगह खडे है उस जगह से हटा भी दिए जायेगे…जो उन्हे यहां तक लाये उन्हें तो याद कर लो..एकला चालो रे की तर्ज पर काम करोगे तो एक दिन अकेले रह जाओगे…और एक ऐसा वक्त आयेगा कोई पुछने वाला तक नी मिलेगा,पद पावर जिन्दगी भर साथ नही रहता…एक बार गया तो वापस नही आता…