झाबुआ। शिक्षा के नाम पर निजी स्कूलों का गोरख धंधा चालु हो गया है। कमीशन के चक्कर में कपडा व पुस्तकों की दुकानों पर इनकी ऐसी सेटिंग है पुस्तक व स्कूल ड्रेस विक्रेता मोटी रकम वसुल कर रहे है। शासन के नियमानुसार सभी निजी स्कूलों पर पुस्तक विक्रेताओं और स्कूल ड्रेस विक्रेताओं की लिस्ट चस्पा करना अनिवार्य है। लेकिन जिले भर में एक भी स्कूल में ये लिस्ट चस्पा नही की गई है। कम से कम 5 दुकानों के नाम अनिवार्य है। लेकिन एक भी निजी स्कूल इस नियम का पालन नही कर रहे है।
अब किसी बच्चे को बेल्ट खरीदना है या फिर हाउस ड्रेस की टी शर्ट तो दुकानदार उन्हें अलग से बेल्ट, टाई या फिर टीशर्ट नही देता… बच्चे को पुरी ड्रेस खरीदनी ही पडेगी। ऐसा ही पुस्तक विक्रेताओं का है अगर कोई विद्यार्थी किसी से पुस्तके ले ले या फिर अपने बडे भाई बहन की पुस्तकें पडी है और उसे एक पुस्तक की आवश्यकता है तो पुस्तक विक्रेता उन्हें एक पुस्तक नही देता हैं ऐेसे में विद्यार्थी करे तो करे क्या?
जुलाई माह से असल में सत्र प्रारंभ हुआ है आज 12 जुलाई है ऐसे में स्कूलों पर पढाई चालु हो गई हैं पुस्तकें लाना भी अनिवार्य है ऐसे में महंगे दामों में मिलने वाली पुस्तके व स्कूल ड्रेस पालकों का बजट बिगाड रही है।
वहीं दुसरी ओर जिम्मेदारों ने कभी भी इस ओर ध्यान नही दिया। बस शिकायत होने का इंतजार करते है और कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता निभाते हुुए इतिश्री कर देते है। अगर एक बार वातानुकुलित कमरों से बाहर निकल कर देखे तो पता चलेगा कि असल में हो क्या रहा है बच्चों के पालक कैसे लुटे जा रहे है। मगर अभी तो कोई मुददा भी नही उठा है और न ही कोई शिकायत आराम से अपने वातानुकुलित कमरे में आंखे मुंदे बैठे रहते है यहीं चल रहा है इन दिनों जिले में।