झाबुआ। नगर में कई राज्यों से लोग अमुख अमुख स्थानों पर आ बसे है… जिनके न तो रिकार्ड है और न ही कोई जानकारी… आप लोगों को ज्ञात हो कुछ वर्ष पूर्व गोधरा कांड का एक आरोपी झाबुआ नगर में यहां के स्थाई दस्तावेज बनवाकर रह रहा था… जो कि 4 वर्ष बाद गुजरात पुलिस ने उसे धर दबोचा था… दस्तावेज कैसे बने ये हर कोई जानता है… क्योकि यहां कुछ जनप्रतिनिधी इस अपराधी को संरक्षण दे रहे थे।
जी हां… हम बातकर रहे है… नगर में आ बसे अन्य राज्यों के लोगों की… जिनका न तो कोई रिकार्ड यहां है… और न ही उन्होने पुलिस वेरिफिकेशन करवा… फिर भी यहां के स्थाई दस्तावेज कैसे बन जाते है ये एक सवाल है?
नगर में चोरी की वारदातों से साथ साथ नशीले प्रदार्थो का कारोबार दिन ब दिन बडता ही जा रहा है… नगर में कई ऐसे वाहन भी है जो अन्य राज्यों के है… जो कहा से आ रहे है कौन ला रहा है… इसकी जानकारी अज्ञात है…।
खैर हम बात करते है नगर में बढती अपराधिक गतिविधियों की… जो बढती ही जा रही है… हाल ही में दो चोरी की घटना घटित हुई… जिसमें सीसी टीवी केमरे में बाईक ले जाते युुवक साफ नजर आ रहे है… ऐसी कई चोरी की वारदाते है जिसमें आसानी से चोरी की वारदातों को अजांम देने वालो को पकडा जा सकता है… लेकिन फिर भी पुलिस उन्हें पकडने में असफल हो रही है… आखिर क्यों… सुना है आजकल कुछ अन्य राज्यों से आये कुछ लोग चोरी की गाडी को तुरंत खोल सारे पुरर्जे अलग कर बेच दिया जाता है… और सारा सामना अन्य राज्य के बहारी लोगों द्वारा लाए वाहनों में इस कार्य को किया जाता है… ये बहारी लोग अधिकांशतः ग्रामीण क्षेत्र में दिखाई दे सकते है… और ये ऐसे चुनिंदा स्थानों या महोल्लों में रहते है… जहां के जनप्रतिनिधी इनके दुर के रिश्तेदार हो… और उन्हे आसानी से यहां का स्थाई निवासी बना दे। खास बात तो यह है कि ये जितने भी अन्य राज्यों से वाहन आये हुए है उनमें अधिकाशतः वाहन उत्तर प्रदेश के नजर आते है। अब देखना यह है कि पुलिस महकमा इस पर कैसे अंकुश लगाता है… अगर एक बार बहारी लोगों के दस्तावेजों की जांच हो गई… सब दुध का दुध और पानी का पानी हो जायेगा… !