आपका भियां निखलेश डामोर
सुदखोरी एक ऐसा जाल है… जिसमें जोे एक बार फंसा… जो वापस बाहर नही निकला… जाया तो वो सडक पर आ गया… या फिर उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली… इसका ताजा उदाहरण है… सुदखोरी में फंसे शशिकांत खत्री का आत्म हत्या वाला मामला… ये हत्या थी या फिर आत्म हत्या ये आप ही बता सकते है… स्वर्गीय शशिकांत खत्री सुदखोरों से इतने परेशान हो गए कि उनके दबाव में आकर आत्महत्या कर ली… इसे हत्या भी कहना गलत नही होगा…!
6 आरोपियों पर नामजद रिपोर्ट दर्ज हुई…. जिनमें दो बडे नाम शामिल है… दिनेश घोडावत और नीलेश घोडावत… इनका ब्याज पर पैसे देने का ऐसा तरीका है… कि एक बार इनके जाल में जो फंसा वो बाहर नही आया… इन दिनों नगर में इनके बाप दादा के जमाने के किस्से खुब चर्चाओं में चले रहे है… सुत्रों की माने… दोनों सुदखोर भाई के पिता नाथुलाल घोडावत भी कुछ कम नही थे… कल्याणपुरा से झाबुआ ब्याज पर रूपए देने के झाबुआ आते थे… कई वर्गो के लोगों को वो ब्याज पर पैसे देते थे.. ब्याज का प्रतिशत होता था 7 प्रतिशत… जो कभी खत्म नही होता था… एक बार वो झाबुआ आये या फिर किसी अन्य जगह गए तो… ब्याज तो ठीक आने जाने का किराया… और एक कचोरी या फिर कुछ ओर खाया तो उसका भूगतान ब्याज पर रूपए देने वालों को करना होता था…. इनकी वजह से भी एक व्यक्ति को अपनी जान से हाथ धोना पडा था… नगर में इन दिनों जनचर्चा है कि बाप तो ठीक बेटे बाप से आगे निकल गए… पिता 7 प्रतिशत ब्याज पर पैसे देता था… और बेटे 10 प्रतिशत ब्याज दर पर पैसे देते है… पिता का व्यवहार तो ठीक था… लेकिन ठीक उनके विपरित है… ब्याज पर ब्याज जोड कर ये लोगों को सडक पर ले आते है… स्वर्गीय शशिकांत के साथ भी इन्होने ऐसा ही किया… ब्याज पर राशि तो ली थी… लेकिन इन्होने ब्याज पर ब्याज जोड कर डेढ करोड कर दी… फिर चालु हुआ इनका अभद्र व्यवहार…. इन दोनों भाईयों ने स्वर्गीय शशिकांत को इनता परेशान करने के साथ साथ जान से मारने की धमकी भी दी…. टिक्की पावडर की दुकान की आड में दोनों भाईयों का मुख्य धंधा सुदखोरी है… अगर पुलिस गहनता से जांच करे तो कई बेनामी संपत्ती के मामले इनके सामने आयेंगे….।
खैर ऐसे कई सुदखोर है… नगर में जैसे महयु जो इनकी गली में रहता है… सोने की तस्करी में महाराष्ट्र पुलिस ने पकडा था… जो मातृशक्ति संगठन की आड में अपने काले धन को सफेद करने में लगा है… सरकारी नौकरी में रहते हुए सुभाषचंद्र झोझा कैसे बना सुदखोर… जीतु जो यादव इलेक्ट्रीक पर झाडु पोछा लगाता था… विक्की जिसके पिता भोपाल गाडी की टिकट काटते थे जो सटटे की आड में…. ललित कैसे सटटे के व्यापार से बडा आगे… और कई ऐसे सुदखोर है जिनका हम नाम सहित परत दर परत मामले आपके सामने लायेंगे… कई सोनी भी है… जो इस काले कारोबार को पर्दे के पीछे से चला रहे है… बाकि अगले अंक में…