आपका भियां निकलेश डामोर
वो कहावत तो आपने सुनी होगी… पैसा फेंकों तमाशा देखों… नगर के जानेमाने व्यापारी शशिकांत की आत्महत्या के बाद नगर में इन दिनों जनचर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर पुलिस को आवेदन देने के बाद भी पुलिस द्वारा कार्रवाई न करता कहीं न कही पुलिस भी शशिकांत आत्महत्या मामले में दोषी नजर आ रही है… अगर पुलिस कार्रवाई करती तो आज स्वर्गीय शशिकांत को आत्महत्या करने की नौबत नही आती… जबकि आवेदन में सब साफ साफ नजर आ रहा है। सुत्रों की मनाने तो कार्रवाई में इसलिए लेटलतीफी हो रही है क्योंकि आरोपी और पुलिस के बीच लक्ष्मी यंत्रों का बडा सौदा हुआ है… और लक्ष्मी यंत्र कौन नही चाहता.. लक्ष्मी यंत्रों के सामने अच्छे अच्छे नतमस्तक हो जाते है… और ये तो पुलिस है… जनचर्चा है कि पुलिस को नीलेश पिता नाथुलाल घोडावत, दिनेश पिता नाथुलाल घोडावत, ललित राठौड, सुभाषचंद झोझा और विक्की सटोरिये पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करना, डाराना धमकाना, सुदखोरी आदि कई धाराओं में अपराध पंजीबद्ध होना चाहिए। मगर ऐसा लगता है कि जिस तरह से कार्रवाई में पुलिस लेट लतीफी कर रही है कहीं न कही अपराधियों को बचने के लिए समय दे रही है… अगर पुलिस इन अरोपियों को पकडती है तो कई चेहरे और सामने आयेगे… जिनकी धमकी भरे फोनों से स्वर्गीय शशिकांत परेशान हो गये थे… वहीं उनके यहां पहले काम करने वाले युवक से भी पुछताछ होनी चाहिए जिसने स्वर्गीय शशिकांत का विश्वास तोडा और व्यापार के सारे पैसे चट कर गया.. जिसका नाम है जितु… ये हम नही कह रहे है नगर की जनता की आम चर्चा है…।
वहीं एक ओर पुलिस अधीक्षक कह रहे है सुदखोरों की खैर नही वहीं दुसरी ओर कार्रवाई न होना पुलिस अधीक्षक पर भी सवालिया निशान खडे हो रहे है… जल्द ही सटोरिये विक्की का खेल अगले अंक में…