दिलीपसिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
चंद्रशेखर आजाद नगरभाभरा जहां भगवान की कथा होती हैं वहां भक्त सुनने आते हैं लेकिन जहां भक्तों की कथा होती हैं वहां स्वयं भगवान सुनने आते हैं।भगवान के परमभक्त भक्तमाल की कथा इसका उदाहरण हैं।यदि हम किसी के आयोजन में सम्मिलित होंगें तो निश्चित ही वह भी समय निकाल कर हमारे जरूर आएंगे।इसलिए जहां भगवान की कथा हो वहां बिना बुलावे के चले जाना चाहिए| उक्त बात चंद्रशेखर आजाद नगर में “नानी बाई को मायरो” कथा में परम पूज्य राष्ट्रीय संत गोपालकृष्ण महाराज ने शिव शक्ति महिला मंडल,चंद्रशेखर आजाद नगर के तत्वावधान में आयोजित कथा के दूसरे दिन व्यासपीठ से बड़ी संख्या में कथा श्रवण करने आएं भक्तों से कही।

महाराज श्री ने कहा कि सत्संग गंगा के समान हैं सत्संग सुनकर कई लोगों का जीवन बदल गया हैं जो गंगा नदी में डुबकी लगाते वह डूब भी सकते हैं लेकिन जो सत्संग रूपी गंगा में डुबकी(ध्यान) लगाने वाला हैं वह हमेशा के लिये तर जाता हैं।ऐसे ही यहां जो कथा श्रवण करने आएं वे भी भगवान के कृपा पात्र हैं| सत्संग का पैमाना भीड़ नहीं होती| संत वक्ता को भीड़ की भूख नहीं होती जो हैं वही श्रेष्ठ हैं|प्रार्थना व साधना में बडा़ बल हैं।बच्चें भगवान का रूप होते हैं, बच्चे का उम्र से कोई तालुक नहीं होता हर वो व्यक्ति जो बच्चों की तरह निश्चल,निष्कपट हो वह बच्चा हैं|बच्चों को सत्संग से जोडे़ उन्हें संस्कारित करें।उन्हें सत्संग में लाएं।यदि संतो का दर्शन,संतों का घर व गांव में आगमन मिले तो ठीक लेकिन संतो की वाणी सुनने को मिल भी मिल जाए तो उस व्यक्ति का जीवन धन्य हो जाता हैं|किसी बुरे व्यक्ति के संगत में आने से जरूरी नहीं आप प्रभावित हो खुद पर इतना विश्वास होना चाहिए कि आपकी संगत में बुरा व्यक्ति भी सुधर जाये न कि आप उसी की तरह बन जाएं|प्रसंगवश कहा कि माता पिता हैं तो दुनिया की सब सुख सुविधा आपके लिये हैं।बेटों को चाहिए कि वे कभी अपने पिता से प्रश्न नहीं पूछे कि हमारे लिये क्या किया और बेटी को चाहिए कि वह कभी ऐसा काम न करें जिससे अपने पिता को सिर झुकाकर चलना पडे़।

“नानीबाई का मायरो”कथा के दूसरे दिन की कथा कहते हुवे महाराज श्री ने बताया कि-भक्ति में बडी़ शक्ति हैं नरसिंहजी की भक्ति के चलते स्वयं कृष्ण भगवान ने उन्हें दर्शन दिये|भगवान की भक्ति आनंद,अनुराग का विषय हैं,न कि तर्क वितर्क का।कथा के दौरान नरसिंहजी की बेटी के विवाह का प्रसंग सुनाते हुवे सभी को भाव विभोर कर दिया ।बेटी की बिदाई के भावभरें प्रसंग पर कथा श्रवण कर्ता भक्तों की आखें भर आई। आगे की कथा कहते हुवे संतश्री ने बताया कि बेटी की बिदाई के साथ जूनागढ़ में ऐसा अकाल पडा़ कि नरसिंहजी का व्यापार ठप्प हो गया धन की कमी के चलते वे अपनी पत्नी का ईलाज तक नहीं करा सके जिसके चलते पत्नी की मृत्यु हो जाती हैं नरसिंह मेहता टूट गये।जो कभी अथाह धन व रूतबे के मालिक थे उनकी स्थिति दयनीय हो गई| वे लोगों को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे।इसलिए मनुष्य को हर समय संभलकर चलना चाहिए।जब तक शरीर स्वस्थ हैं भगवान की भक्ति कर लेना चाहिए,मंदिर हो या सत्संग,जहां धर्मकाज हो वहां चले जाना चाहिए। इतना सबकुछ होने के बाद भी नरसिंहजी पर आई विपत्ति के बाद भी उनके चरित्र से सभी को बहुत कुछ सीखना चाहिए।इसी के साथ दूसरे दिन की कथा का विराम दिया| कथा के दौरान आएं कई प्रसंग मार्मिक प्रसंगों ने सभी की भाव विभोर किया तो वहीं भगवान के भजनों पर महिलाएं खुद को झूमने से नहीं रोक पाई। दूसरे दिन की कथा का समापन यजमान मुकेश अग्निहोत्री व पत्नी पूजा अग्निहोत्री की ओर से आरती प्रसादी के साथ हूवा।