झाबुआ। एक ओर शासन शिक्षा का अधिकार नारा लिए बच्चों की शिक्षा के लिए नित नए प्रयास कर रही है। वहीं दुसरी ओर एक बच्चें को फिस नही भरने की वजह से शिक्षा से वंचित होना पड रहा है…।
जी हां हम बात कर रहे है न्यू कैथोलिक मिशन स्कूल में चिन्टु की (परिवर्तित नाम) जो न्यू कैथोलिक मिशन स्कूल में कक्षा 2 री में पढ 2022 वर्ष में पढ रहा था। चिन्टु के पिता नही है और मां के पास आई का साधन नही है और आर्थिक स्थिति भी इतनी मजबुत नही कि वो फिस भर पाये। परिजनों ने चिन्टु को सरकारी स्कूल में दाखिल करने का सोचा और संस्था के बाबु धमेन्द्र यादव से काफी मिन्नते की लेकिन उन्होने एसएलसी देने से इन्कार कर दिया। आज दो साल बित चुके है चिन्टु एक एसएलसी की वजह से स्कूल ही नही जा पा रहा है। आज एक बार फिर चिन्टु की माता जी प्राचार्य फादर जॉनसन से चर्चा करने पहुंची कि कुछ रियायत मिल जाये और प्राचार्य उनकी समस्या तो सुने। लेकिन प्राचार्य फादर जॉनसन उनकी सुनी ही नही और अभद्रता पूर्ण चिल्ला कर वहां से रवाना कर दिया और कह दिया फिस भरो फिर एसएलसी ले जाओ… एक बार परिजन की सुनते तो सही… जो संस्था अल्पख्यक के नाम पर चल रही है वो कुछ तो रियायत दे सकती थी। एक बच्चे के भविष्य का सवाल था? लेकिन फादर को दया नही आई… अब चिन्टु बिना एसएलसी के स्कूल कैसे जायेगा… और क्या एक महिला के साथ फादर को अभद्रता करना क्या शोभा देता है।
कलेक्टर महोदया इस मामले को संज्ञान में लिजीये ताकि एक बच्चें भविष्य से खिलवाड ना हो सके। उस मासुम की क्या गलती है… क्या गरीब होना पाप है…. क्या एक गरीब अच्छी स्कूल में नही पढ सकता… कलेक्टर महोदया आपने अगर इस मामले को संज्ञान में लिया तो एक बच्चे का भविष्य सुधर जायेगा… और स्कूल की जांच भी की जाये… वहीं स्कूल के शिक्षकों की भी योग्यता की जांच हो… तब होगा दुध का दुध और पानी का पानी… कलेक्टर महोदया शिक्षा कोई व्यापार नही है… चिन्टु का भी अधिकार है शिक्षा लेना लेकिन जो संस्था सेवा के नाम पर संचालित हो रही है वहां एक बच्चे को फिस नही भरने की वजह से एसएलसी नही दी जा रही है… आज दो से तीन वर्ष हो चुके है बच्चें ने स्कूल का मुंह तक नही देखा… अब आप ही कुछ किजीए..।