झाबुआ। नगर पालिका की अधिपत्य में आने वाली दुकानें विक्रय करते समय या लीज पर देते समय नियमावली में स्पष्ट होता है कि इन दुकानों में किसी भी प्रकार से मांस मछली, या फिर शराब का विक्रय किसी भी प्रकार से नही किया जायेगा। ऐसे में नगर पालिका अधिपत्य की दुकानें जो नगर पालिका के पास ही स्थित है उन दुकानों में बिना लाईसेंस के नियमों के विरूद्ध चिकन मटन का विक्रय खुलेआम किया जा रहा है। लेकिन नगर पालिका के अधिकारी कर्मचारी व पार्षदगण और ना ही प्रशासन इस ओर ध्यान ही नही दे रहे है।
जब इस संबंध में सीएम हेल्पलाईन में शिकायत की गई तो नपा कर्मचारियों ने इन मांस विक्रेताओं को बचाने के लिए एसडीएम साहब का आदेश का हवाला दे दिया गया। शिकायत थी मुख्यमंत्रीजी के आदेशों के बाद भी नगर पालिका के समीप खुलेआम चिकन मटन का विक्रय हो रहा है। इन विक्रेताओं के पास न तो लाईसेंस है और ना ही नगर पालिका अनुमति, न तो नगर पालिका इस ओर ध्यान दे रही है और न ही एसडीएम व पुलिस विभाग, जबकि नियमानुसार नगर पालिका की अधिपत्य वाली दुकानों में मांस मछली व शराब का विक्रय नही किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो उन दुकानों को नगर पालिका अधिनियम के तहत राजसात किया जा सकता है। लेकिन न जाने क्यों नगर पालिका सीएमओ और कर्मचारी इन पर कार्रवाई करना नही चाहते है।
जब ये शिकायत हुई तो नगर पालिका कर्मचारी द्वारा एसडीएम साहब का हवाला देकर शिकायत बंद करने की बात कही गई। जबकि जिस आदेश का हवाला कर्मचारी कर रहे है वो आदेश का खंडन नगर पालिका उपाध्यक्ष लाखनसिंह सौलंकी द्वारा एसडीएम कार्यालय पहुंच कर मीडिया के समक्ष किया था उस समय युवा नेता बिटटु सिंगार व पार्षदगण उपस्थित थे और खंडन के बाद एक आदेश भी जारी किया था कि नगर पालिका परिषद के पार्षदों द्वारा किसी भी प्रकार से नगर पालिका के समीप स्थित दुकानों में मांस विक्रय का नही कहा गए एसडीएम साहब का आदेश हमारे द्वारा मान्य नही किया जाता है। अब ये समझ से परे है कि आखिर सही कौन है? कर्मचारी या फिर परिषद के पार्षद. या फिर सीएमओ व कर्मचारियों की मांस विक्रेताओं से सेटिंग है तभी तो कोई कार्रवाई नही करना चाह रहे है और सीएम हेल्पलाईन में हुई शिकायत में झुठी जानकारी दे रहे है। कहीं न कहीं यहां लक्ष्मी यंत्रों की सौगात मिलने के आसार लगते है तभी तो कर्मचारी सभी पार्षदों और अध्यक्ष उपाध्यक्ष की छवि धुमिल करने में लगे हुए है।