परिवेश पटेल
रबी फसल के सीजन में इस बार उपयुक्त मौसम न बनने के कारण फसलों से उत्पादन के कमी की संभावना बढ़ गई है। मौसम परिवर्तन से तापमान में दर्ज की जा रही बढ़ोतरी का फसलों पर विपरीत असर देखने को मिल रहा है। जिससे फसलों के उत्पादन में गिरावट की दर्ज की जा रही है। दाने कमजोर हो रहे है, गेहू के दानों में चमक नही दिख रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रबी फसल के सीजन में जिले में 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं समेत विभिन्न फसलों की बुआई की गई है। रबी सीजन में गेहू सहित अन्य फसली की बुआई की जाती है। इन फसलों के लिए दिसंबर, जनवरी व फरवरी महीने में कोहरे व ठंड का मौसम होना अनिवार्य होता है। इसके लिए अधिकतम 18 डिग्री व न्यूनतम तापमान 0 से 5 डिग्री तक होना अनुकूल है। ऐसे मौसम में गेहूं, व चने के पौधों में तेजी से फुटाव होता है तथा पौधों की लंबाई में भी अच्छी बढ़ोतरी होती है,लेकिन रबी फसल के इस सीजन में दिसंबर, जनवरी के साथ फरवरी का महीना बीतने को है, परंतु जलवायु परिवर्तन के कारण प्रतिदिन मौसम परिवर्तन हुआ है। पिछले एक सप्ताह से तो दिन के तापमान में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। इस प्रकार पिछले दस दिनों से अधिकतम तापमान में हो रही बढ़ोतरी के चलते दिन के समय गर्मी का एहसास हो रहा है। जिस कारण समय से पहले फसल पाक कर तैयार हो रही है। ऐसे में दाने चमक व कमजोर निकल रहे है।

फसलों के अनुकूल नहीं रहा मौसम, उत्पादन निकल रहा कम
किसान शभुलाल पाटीदार ने बताया कि गेहू की फसल के लिए दिसंबर से फरवरी तक लगभग तीन माह तक मौसम में ओस व ठंड होना बहुत जरूरी है। तभी फसल के पौधों में तेजी से बढ़वार होती है तथा लंबाई में भी बढ़ोतरी होती है। इससे बंपर उत्पादन होने की उम्मीद होती है। लेकिन इस बार फसलों के अनुकूल मौसम नहीं रहा। माउठा गिरने से फसलों की उत्पादकता पर विपरीत असर पड़ा है। वही फसल की लंबाई भी कम रह गई है। और वर्तमान में मौसम में इसी प्रकार बढ़ोतरी दर्ज की गई तो गेहूं की फसल से उत्पादन की कमी का दंश झेलना पड़ सकता है। दाने छोटे व कमजोर निकलरहे है। दाने चमक भी नही है।
रबी सीजन में मौसम परिवर्तन से फसलो को नुकसान
ग्राम रामनगर के किसान चम्पालाल पाटीदार ने बताया कि रबी सीजन में पल पल परिवर्तित मौसम से गेहू की फसल पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। दिसंबर में तापमान तापमान में बढ़वार जनवरी में मावठा ओर फरवरी में गर्मी में लगातार बढ़वार से फसलो पर असर हुआ है। फसलो को निकाल रहे है तो गेहू के दाने कमजोर, उत्पादन में कमी आ रही है। गेहू के दाने की चमक भी खत्म हो रही है। जिससे उत्पादन कम निकल रहा है।
जलवायु परिवर्तन का असर है
कृषि मित्र योगेश पाटीदार ने बताया कि वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम परिवर्तन देखने को मिल रहा है। जिसका असर फसलो पर होता है। जिससे उत्पादन पर फर्क पड़ता है। अभी तो फसल पककर तैयार है। उत्पादन निकलने के बाद ही पता चलेगा। मौसम परिवर्तन का असर कितना हुआ है।
तापमान की भूमिका महत्वपूर्ण
गेहूं की फसल की अच्छी बढ़वार और उपज में तापमान की भूमिका प्रमुख होती है। गेहूं में दाना भरने के समय तापमान बढ़ने से ऊपर का तापमान फसल को प्रभावित करता है। बदलते जलवायु परिवर्तन से फसलो के उत्पादन में कमी की संभावना हो सकती है।
नागिन रावत कृषि उप संचालक झाबुआ।