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उच्च शिक्षा संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में डि – रिजर्वेशन किए जाना आरक्षित वर्ग के शिक्षित युवाओं के लिये उचित नहीं – आकास जिलाध्यक्ष भंगुसिंह तोमर

दिलीपसिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ 

अलीराजपुर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा दिनांक 27 दिसम्बर 2023 को जारी डि-रिजर्वेशन के सम्बंध में आकास संगठन ने महामहिम राष्ट्रपति एवं अध्यक्ष यूजीसी को लिखा पत्र

अलीराजपुर:- विगत दिनों विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अधिकृत वेबसाइट पर उच्च शिक्षा संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विभिन्न संवगों के पदों को डि-रिजर्व किया जाकर पदों को सामान्य वर्ग से भरे जाने की प्रक्रिया का उल्लेख चैप्टर-10 में किया गया है। जिसकों लेकर आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास)अलीराजपुर के जिलाध्यक्ष भंगुसिंह तोमर ने महामहिम राष्ट्रपति,अध्यक्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), केंद्रीय शिक्षा मंत्री भारत सरकार, महामहिम राज्यपाल,माननीय मुख्यमंत्री एवं प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा विभाग म0प्र0 शासन को पत्र लिख कर मांग की गई हैं कि यदि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों की उपलब्धता न हो तो विश्वविद्यालय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए पदों को डि-रिजर्व करते हुए सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों से भर जाने का प्रावधान किया गया है जो कि आरक्षित वर्ग के शिक्षित युवाओं के लिये उचित नहीं है।

इसी प्रकार पदोन्नति हेतु लंबे समय से रिक्त पदों को सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों से भरे जाने की प्रक्रिया का उल्लेख किया है। श्री तोमर ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का प्रस्तावित मसौदा अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के पढ़े-लिखे युवा वर्गों के हितों के विरुद्ध होकर इन वर्गों को समाज की मुख्य धारा में आने से रोकने का एक सुनियोजित षड्यंत्र होकर अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भारतीय संविधान की अनुसूची 15(4), 16(4), एवं 16(4 A) के प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। अतः समस्त अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के समाज तथा आदिवासी कर्मचारी अधिकारी संगठन (आकास) की ओर से उपरोक्तानुसार प्रस्तावित डि-रिजर्वेशन मसौदे के विरुद्ध आपत्ति दर्ज करते हैं तथा भारत सरकार से निवेदन पूर्वक आग्रह करते है कि यदि इस मसौदे पर चर्चा या अमल में लाने की यदि कोई कोशिश हुई तो समाज का समस्त वर्ग उक्त मसौदे एवं भारत सरकार कि इस नीति का पुरजोर विरोध करने के लिए हड़ताल, धरना प्रदर्शन इत्यादि करने हेतु बाध्य होगा।

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