दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
जेसे जेसे नगर में राष्ट्रीय राज्य मार्ग के लिए जमीन तलाशी जा रही है साथ ही वेकल्पिक मार्ग भी खोजा जा रहा है वैसे वैसे ग्रामीणों और नागरवासियो की चिंता बड़ रही है क्योंकि ग्रामीण इलाको से अगर राष्ट्रीय राज्य मार्ग निकला तो उससे कई गरीब आदिवासियो की जमीन चली जायेगी लेकिन वही राष्ट्रीय राज्य मार्ग नगर के बीच से निकलता है तो नगर में सबसे पुरानी सड़क जो शुरू से पीडब्ल्यूडी की है उस पर बिना अनुमति अपने स्वार्थ सिद्ध करने के उद्देश से कुछ लोगो ने सड़क की निजी भूमि पर दुकानों का निर्माण कर कही सस्ती तो कही कई गुना कमीशन खाकर उनको अपने चहेते दुकानदार या व्यापारी को बेच दी और वैसी ही गलती जनपद पंचायत ने भी की पीडब्ल्यूडी की सड़क सीमा को अपनी सीमा बताकर सड़क के किनारे दुकानों का निर्माण और आम दुकानदारों और भोली भाली जनता को हमेशा हमेशा रोजगार देने के नाम पर दुकानों का निर्माण कर उनको भी कमीशन का खेल खेल कर दुकानें बेच दी गई जबकि नगर परिषद भाभरा और जनपद पंचायत में किसी सत्ता थी नगर के आम नागरिक भली भाती जानते है लेकिन अपनी दुकानदारी और अपनी लाचारी के कारण कोई बोलना नही चाहा लेकिन आज जब राष्ट्रीय राज्य मार्ग का निर्माण और उसके लिए नगर के बीच सड़क की जमीन के बीच अपनी पूरी दुकान नगर परिषद और राजस्व के अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा नपती की गई और पूरी की पूरी दुकान सड़क की जद में आ गई तब से लेकर अभी समय तक वह सोच में पड़े हुवे है की अगर सड़क का निर्माण यही से किया गया तो दुकानों का तोड़ा जाना तय है अगर दुकानें टूट गई तो वह अपना व्यापार व्यवसाय केसे करेगा और कहा करेगा ।लेकिन आज तक नगर परिषद और जनपद पंचायत ने इसकी वेकलिप व्यवस्था नही की लेकिन जनपद पंचायत के पास पर्याप्त जमीन है जो फिर से दुकानों का निर्माण कर सकते है लेकिन नगर परिषद की बनी सारी दुकानें टूट जायेगी तो सभी दुकानदार और व्यापारी सड़क पर आ जायेगे जिसकी नगर परिषद ने व्यवस्था तक नही की लेकिन सड़क का निर्माण होना तय है आदिवासियो ने अपनी उपजाऊ जमीन पैसा कानून का हवाला देकर रोक और आंदोलन की चेतावनी और ज्ञापन देकर विद्रोह कर लिया जिससे जिला प्रशासन के पास नगर की इसी बाय पास सड़क को ही राष्ट्रीय सड़क के निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही के अलावा कोई दूसरा विकल्प बचा ही नहीं लेकिन सवाल यह उठ रहा है की जब राष्ट्रीय राज्य मार्ग की जमीन पर सड़क के ऊपर ही दुकानें निर्माण की गई तो कोई भी प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी ने आपत्ति कोई नही उठाई क्या उसकी भी जुबान लक्ष्मी तंत्रों से कमीशन खोर नगर परिषद और जनपद पंचायत के अधिकारी और कर्मचारियों के अलावा पार्षद और अध्यक्ष ,विधायक और सांसद और नगर के जन प्रतिनिधियों ने आपत्ति क्यों नही ली क्यों आम जनता को दिन दहाड़े रोजगार और व्यापार के नाम पर पक्की दुकानें बनाकर चुना लगा रहे सभी लोगो का साथ दिया जिससे आज इतने वर्षो की कड़ी मेहनत और उनकी गाड़ी कमाई भी चल जायेगी और साथ ही बेरोजगार भी दोबारा से ही जायेगे ।लेकिन राष्ट्रीय राज्य मार्ग नगर के बीच से निकल भी गया तो नगर के व्यापार व्यवसाय की रौनक हमेशा बनी रहती है लेकिन जैसे ही नगर के बाहर बायपास बने वैसे ही नगर की रौनक और व्यापार खत्म होकर बायपास रोड पर परिवर्तित हो जाता है ।लेकिन आज बात है ।राष्ट्रीय राज्य मार्ग का जब भी निर्माण होगा आम लोगो का ही नुकसान होगा ग्रामीण एरिया से निकलेगा तो खेती लायक उपजाऊ भूमि जायेगी और नगर से निकला तो कई दुकानें और कई लोगो का रोजगार ।विकाश जब भी हुवा है नुकसान तो होता ही है ।लेकिन परिवर्तन ही संसार का नियम है ।