वॉइस ऑफ़ झाबुआ-
झाबुआ। जगह निर्धारित हो फिर हो लाईसेंस जारी और सारे नियमों का हो पालन…!
बडे पशुओं (पाडे) के मांस विक्रेताओं के तो नियमों अनुसार लाईसेंस ही जारी नही हो सकते…!
झाबुआ। अरे अब तो भाजपाईयों को लोग बधाईयां देने में लगे है… इन दिनों जनचर्चा है कि ऐसा प्रशासन मुख्यमंत्रीजी की छवि दागदार करने के लिए काफी है। मुख्यमंत्री याने प्रदेश का मुखिया और उनके ही आदेशों की अव्हेल्ना कहा तक उचित है। न किसी के पास लाईसेंस है और न ही अन्य विभागों की रिपोर्ट..। फिर भी दुकानदारी तो आज भी खुलेआम चल रही है। बडी बात तो यह है कि चंद लक्ष्मी यंत्रो के चक्कर में इन अवैध मांस विक्रेताओं को सरकार के मुलाजिंम ही सुचना दे देते है और शिकायत कर्ता का नाम भी बता देते है। अगर मांस विक्रय करने वालों को लेकर प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव के आदेशों को अच्छी तरह पढा जाये ।तो सारे नियम कायदें ताक में रखे जाये। बडी बात तो यह है कि एक भी मांस विक्रेता ने न तो नगर पालिका को जो बकरा, मुर्गी, पाडे काटने का शुल्क जमा करवाया और ना ही पशु चिकित्सकों से जांच करवाई। पंचायत अधिनियम के तहत जो नियमावली बनाई गई है उन्हे एक भी विभाग द्वारा पालन ही करवाया गया। झाबुआ जिला एक आदिवासी बाहुल्य जिला है यहां के नियम कायदे बिल्कुल अलग है ऐसे में प्रशासन इन नियमों को अनदेखा कर न जाने क्यों मुख्यमंत्री जी के आदेशों की अवहेल्ना कर रहे है।
नगर पालिका में कई लोगों ने लाईसेंस की एनओसी के लिए आवेदन दिया है क्या नगर पालिका नियमों का पालन करते हुए एनओसी जारी करेगी और जो नगर पालिका को किसी भी प्रकार के पशु वध गौवंश को छोड तो प्रत्येक पशु वध पर लिया जाता है वो लेगी। बडी बात तो यह है कि ये पुरा बाजार नगर के बाहर होना चाहिए जो नगर के सभी लोगों की मांग है वो जगह निर्धारित कर किसी भी प्रकार से आबादी क्षेत्र में विक्रय नही होना चाहिए। बडी बात तो यह है बडे पशुओं (पाडे) के मांस विक्रेताओं के लाईसेंस जो जारी ही नही होना चाहिए क्योंकि यहां स्लाटर हाउस तो है ही नही और पंचायत अधिनियम के तहत पाडे क्यों काटे गए, कहा ले जायेगे और पंचायत का ठहराव प्रस्ताव व एनओसी की नितांत आवश्यकता है। अभी तक जो चलता आया वो ठिक है लेकिन अब तो नियमों का पालन हो या फिर लक्ष्मी यंत्रों के चक्कर में मुख्यमंत्री जी की छवि धुमिल करते रहो। ये सब हम नही कह रहे है इन दिनों ये नगर की और गलियारों की आम चर्चा है हमें तो सुत्रों से पता चला ।