दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
कैलाश भील हत्याकांड को दबाया जा चुका है, क्या मिलेगा कैलाश के परिवार को न्याय…??? क्या अलीराजपुर जिले के प्रशासनिक अधिकारी अवैध धंधों रेत माफियाओं, शराब माफियाओं, गुंडागर्दी से दब चुका है..?? कहीं कमीशन के गुलाम तो नही..??? जिले में हुवे कट्ठीवाड़ा महाघोटाले में लिप्त पांच आरोपियों को अग्रिम जमानत मिल चुकी है, और मुख्य आरोपी को फरार बताकर जिला पुलिस ने अपनी किरकिरी तो खूब करवाई और पांच हजार का मामूली इनाम घोषित कर वाहवाही लूटने का जो काम किया जा रहा था वो भी जनता को गुमराह करने जैसा है, क्योंकि यहां घोटाला हजारों रूपयो का नही करोड़ों का है प्रशासन से ज्यादा तो कमल राठौड़ उस व्यक्ति को रुपए दे सकता है, जो उसके रहने का ठिकाना जनता है लेकिन अलीराजपुर जिले की पुलिस बीते कई माह से नकारा ही साबित हो रही है, क्योंकि गबन कांड से पहले भी सोने चोरी कांड और कैलाश भील हत्या कांड में भी कोई परिणाम आज तक नही आया सोंडवा ब्लॉक का यह कांड भी करोड़ों रूपयो का है जिसमे खुद पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लिप्त थे जिसने एक गरीब आदिवासी महिला और उसके परिवार के लोगो को डरा धमकाकर सोने के सिक्के जमीन से गड़े हुवे खुदवाकर सारे के सारे बस एक सिक्के को छोड़ 240 सिक्के चोरी कर ले आए और आज तक सिक्को के बारे में पूरा पुलिस प्रशासन कुछ भी नही कर सका और आज भी गरीब आदिवासी परिवार अपने सिक्को के इंतजार में घर पर बैठकर रोने और पुलिस और प्रशासन के सामने अपनी लाचारी में जीने के अलावा कुछ भी नही कर सकता क्योंकि अब उनका साथ कोई भी देने वाला नही है महीनो बीत जाने के बाद भी अब किसी भी संगठन और किसी भी राजनेता या जनप्रतिनिधि ने इस मुद्दे और सोने के कांड में लगभग बोलना भी बंद कर दिया और बोले भी क्यों जिनका उल्लू सीधा होना था उनका उल्लू सीधा हो चुका है और अब भाड़ में जाए गरीब आदिवासी परिवार। वैसा ही कांड कैलाश भील ही हत्या कांड का भी है जिसमे अपने बाबा के घर चोरी हुई थी उसकी रिपोर्ट और उसकी उचित जांच कर अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए आजाद नगर थाने में अपनी। गुहार लगाने के कारण आजाद नगर थाना के पुलिस जवानों सहित अधिकारी और कर्मचारियों ने ही शिकायत कर्ता का ही मुंह बंद कर दिया। यह तो उस कहावत की तरह हो गया है ना रहे बास और ना बजे बांसुरी की तर्ज पर कैलाश को ही मार मार कर थाने में मार दिया और उसकी लाश को पानी से गीला कर कुवे में गिरकर मौत हुई ऐसा घटना क्रम रचकर खुद पुलिस विभाग खुद के विभाग के आरोपियों को बचाने में जुट गया था और चोरी छिपे उसकी हत्या को एक दुर्घटना बनाने का हर संभव प्रयास किया लेकिन आदिवासी सामाजिक संगठनों के घोर विरोध के बादजूद अदालती जांच का हवाला देकर आज तक कैलाश भील के परिवार से जिला प्रशासन ने जो छल किया और आज भी आरोपियों को कोई सजा नही मिल पाई लेकिन कैलाश भील की हत्या होने के बाद उसकी पत्नी और उसके बच्चो और उसके माता पिता को जो सजा जीवन भर भुगतने को रोड पर छोड़ दिया जिला प्रशासन ने उस समय वादे बहुत बड़े बड़े दिए आश्वासन भी बड़े बड़े दिए पत्नी को नोकरी बच्चो को अच्छी शिक्षा और आवास तक की बात हुई लेकिन उसके परिवार को न्याय और आज तक नमक की थैली तक जिला प्रशासन नही दे पा रहा है और रही बात आज तक लाखो प्रकरण न्यायालय में पेंडिंग पड़े है आरोपियों को सजा होते होते वर्षो बीत जाते है यह हिंदुस्तान का न्याय रहा है इतिहास में ऐसे भी कई प्रकरण है जिसमे अपराधी को सजा होने से पहले फरियादी ही दुनिया से जा चुके होते है। लेकिन अलीराजपुर जिले के किसी भी विभाग से जिले के आदिवासी लोगो को न्याय की उम्मीद ही नही करनी। चाहिए क्योंकि आज तक ड्रेस कांड, गेहूं चावल कांड, उदयगढ़ शिक्षा विभाग का करोड़ों का घोटाला, कट्ठीवाड़ा शिक्षा विभाग का करोड़ों का घोटाला और सोने के सिक्का कांड और कैलाश भील हत्या कांड जिले के प्रत्येक नागरिक के सामने एक उदाहरण की तरह प्रस्तुत है जिसने किसी भी आरोपियों को उचित सजा या उनके द्वारा गबन या भ्रष्टाचार की गई राशि को आज तक प्रशासन वापस ले पाया हो या आरोपियों को सजा मिल पाई हो ।आगे जिला प्रशासन इन सभी मामलों में क्या खेल खेलेगा आगे वॉइस ऑफ झाबुआ के अगले अंक में आपको पढ़ने मिलेगा।