प्युन को बनाया ड्राइवर और खुद बने अधिकारी।
कोचिंग जाते है,,नाम काटो इन बच्चों का।
लक्की राठौड़ बरवेट
आज हम फिर हाजिर हो गए मालवी पुराण लेकर…. शिक्षक जिसे दे रहे हैं हिटलर की उपाधि…. पत्रकार जिसे बता रहे हैं तानाशाह…. लेकिन देखा जाए तो यह सब उपाधियां बहुत छोटी लगने लगती है जब साहब के पिछले कारनामों पर नजर जाती है।सुना है हॉस्टल के बच्चों ने भी ठोक पीट कर दी थी… एक शिक्षक का धर्म होता है वह बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ उच्च संस्कार, उच्च आचरण और अनुशासन का पाठ पढ़ाए…..लेकिन जो खुद ही शराब में डूबा हुआ हो,, वह बच्चों को तेरा कर क्या भवसागर पार कराएगा।
अब तानाशाही और बादशाहत का नमूना देख लीजिए की साहब को अपने कार के लिए एक ड्राइवर की आवश्यकता थी.. बस फिर क्या था अपने स्कूल के प्युन को बना लिया ड्राइवर… और स्कूल में काम के लिए दूसरे गांव की स्कूल से बुला लिया।अपने काले बेग में बिसलेरी की बोतल में मादक पदार्थ का सेवन करने के साथ साहब को यह होश ही नहीं रहता कि वह किस से क्या बात करें….क्या पत्रकार,क्या पालक और क्या शिक्षक किसी को कुछ नहीं समझते…. अभी कुछ दिनों पहले कुछ बच्चे कोचिंग पर जाने की वजह से 5 मिनट अंतराल से स्कूल पहुंचे… फिर क्या था साहब ने हिटलरी फरमान सुना दिया… नाम काटो इन बच्चों का नोटिस भेजो इनको…. अब साहब का खुद का टाइम टेबल तो सही सेट है नहीं और धौंस बच्चों पर जमा रहे…
वैसे स्कूल की फीस में भी काफी रुपया आया है…. हालांकि सूचना के अधिकार में अन्य बिलों के साथ इसका भी हिसाब तो देना पड़ेगा….
वह तो भोले भाले और ईमानदार शिक्षक हैं जो अपने कर्तव्य पथ से जरा भी डगमग नहीं हो रहे हैं और सब यातनांए सहकर भी अपने कर्म को महत्व दे रहे हैं….
मालवी पुराण, द्वितीय अध्याय समाप्त,,
आगे फिर पढे अगले अंक में……पढ़ते रहिए वाईस आफ झाबुआ….