जनसुनवाई से उठता जनता का विश्वास…?
जवाबदारों ने जनसुनवाई को बनाया मजाक !!
अपनी पैतृक जमीन को बचाने के लिए कैंसर पीड़ित दर-दर भटकने को मजबूर कोई सुनने वाला नहीं…
सिस्टम से परेशान केसर पीड़ित…
वॉइस ऑफ़ झाबुआ सुनील खोड़े
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पेटलावद। कैंसर से पीड़ित दिनेश पाटीदार इन दिनों जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा हैं। और इस संघर्ष के बीच वह अपनी निजी जमीन को बचाने के लिए स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला कलेक्टर तक गुहार लगा चुका है….परंतु जवाबदार अब तक कैंसर पीड़ित दिनेश की बात को समझ नहीं पा रहे हैं… औऱ ना ही दिनेश के द्वारा दिये गए आवेदन पर कोई जांच या कोई कार्रवाई कर रहे। लगातार दिनेश अपनी पैतृक जमीन को बचाने के लिए जद्दोजहद करने को मजबूर हैं।
“””कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे पीड़ित दिनेश ने वॉइस ऑफ़ झाबुआ से चर्चा में बताया कि मेरे पड़ोस मैं रहने वाले अयोध्या पिता दुर्गादास बैरागी का इन दिनों मकान निर्माण का कार्य चल रहा है…इस निर्माण कार्य के दौरान उन्होंने जोर जबरदस्ती मेरी जमीन के ऊपर से दीवार का निर्माण कर लिया है। जो कि गलत है। अब बारिश का मौसम चल रहा है और मेरा मकान का एक हिस्सा खुला पड़ा है जिसमें बारिश का पानी भी आता है। और घर का सामान चोरी होने का भी डर बना हुआ है। और जो निर्माण कार्य किया जा रहा है। वह मेरी पैतृक जमीन पर जोर जबरदस्ती और दादागिरी के दम पर कब्जा किया जा रहा है। जिसे रोकने के लिए मेरे द्वारा ग्राम पंचायत से लेकर तहसील औऱ जिला मुख्यालय तक को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगा चुका हूं। यहां तक जनसुनवाई औऱ पुलिस प्रशासन को भी कई बार आवेदन दे चुका परंतु अब तक प्रशासन ने मौके पर आकर मोके का निरीक्षण नहीं किया में सरकारी दफ्तर और जिम्मेदारों के चक्कर काटते काटते मैं हताश और परेशान हो गया हूं…पहले से ही में कैंसर जैसी भयावह गम्भीर बीमारी से झुंझ रहा हूं। और ऐसी स्थिति में प्रशासन भी मेरे लिखित आवेदन देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। सिर्फ मेरी प्रशासन से इतनी मांग है कि आप मौके पर आकर जांच कर कर लेवे क्योंकि विपक्ष अयोध्या पिता दुर्गादास बैरागी ने जो निर्माण कार्य किया है। वह गलत तरीके से किया है । उक्त भूमि की चतुर्मास सीमा इस प्रकार है। चौड़ाई उत्तर और दक्षिण 25 फीट जबकि असल में 22 फीट में मकान स्थित था पूर्व पश्चिम में 20 औसतन 22 फिट दर्शाया गया हैं। जबकि असल में 17 फीट में मकान बना हुआ था अब रजिस्ट्री के आधार पर जगह मापने पर मेरी शामलाती दीवार के अंदर तक सीमा बताकर मेरी पैतृक भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया मेरे द्वारा लगातार प्रशासन को सिर्फ मौके पर आकर मेरे आवेदन का निराकरण कर दे इतनी मेरी प्रशासन से गुहार है। परंतु कोई यहां सुनने वाला नहीं है। मेरा धीरे-धीरे अब जनसुनवाई से भी विश्वास उठता जा रहा है । क्योंकि प्रदेश के मुखिया ने एक बेहतरीन सुनवाई के रूप में जनसुनवाई को संचालित किया था परंतु अधिकारियों ने जनसुनवाई का मजाक बनाकर रख दिया है कई बार आवेदन देने के बाद भी निराकरण नहीं हो पा रहा इसका मतलब जनसुनवाई सिर्फ एक मजाक बनकर रह गई है। पेटलावद अनुभाग में तो कोई आवेदन देना पसंद ही नहीं करता क्योंकि यहां पर सारे अधिकारियों की ऐसी सेटिंग है । कि शिकायत होते ही तुरंत संबंधित के पास फोन पहुंच जाते हैं । निष्पक्ष कोई भी कामकाज नहीं हो पा रहा मुझे दर-दर भटकने पर मजबूर होना पड़ रहा है। 8 अगस्त मंगलवार को एक बार फिर जनसुनवाई में मेरे द्वारा पेटलावद एसडीएम अनिल कुमार राठौर को आवेदन देते हुए मेरी पीडा बताई ओर न्याय की गुहार लगाई एसडीएम साहब ने भी मुझे आश्वासन दिया है कि हम जल्द ही आपकी समस्या का समाधान करने के लिए आपके गांव आएंगे जो भी सही होगा उसका निराकरण किया जाएगा यदि उसके बाद भी मेरी कोई सुनवाई या निराकरण नही होता हैं तो में परिवार सहित आत्महत्या कर लूंगा उसका जवाबदार प्रशासन और अयोध्या पिता दुर्गादास वैरागी होगा यदि मुझ केंसर पीड़ित को न्याय नहीं मिलता है तो..!!!