दुर्भावनावश दिव्यांग शिक्षक का दो बार करवा दिया ट्रांसफर…!
पार्टी के ही नेता पार्टी को डूबोने में लगे…!
पंचायत,जिला पंचायत उपचुनाव में करारी हार के बाद भी बाज़ नहीं आते पार्टी नेता…!
क्षेत्र में पार्टी को कैसे मिलेगी जीत…?

सुनिल डामर
जिस प्रकार से जनजाति कार्य विभाग में शिक्षकों के एकसाथ थोक बंद तबादले किए जा रहे हैं कई के तबादले स्वेच्छिक तो कई शिक्षकों के तबादले अधूरिये नेताओं ने दुर्भावनावश करवाए हैं….सूत्रों की मानें तो सत्तापक्ष नेताओं ने कई शिक्षकों के नाम ट्रांसफर सूची में जुड़वा दिए और बाद में उन शिक्षकों से लक्ष्मी यंत्रों की मांग भी यह कहकर की गई की हम तुम्हारा ट्रांसफर रूकवा देंगे।जब बात नहीं बनी तो ट्रांसफर करवा दिया। और इस मामले में पिछली बार भी ट्रांसफर सूची में नाम शामिल करवाने के बाद जब वापस हटवाने प्रभारी मंत्री के बंगले तांक झांक करने गए तो वहां पर प्रभारी मंत्री ने फटकार भी लगाई थी।
इस बार भी अधूरिये नेताओं ने दुर्भावनावश यहां एक ऐसे दिव्यांग शिक्षक रामचंद्र भूरिया पिता खिमा भूरिया प्राथमिक शिक्षक कदवाली संकूल बैडावा विकास खंड थांदला से प्राथमिक विद्यालय पतरा संकूल मांडली विकास खंड मेघनगर ट्रांसफर करवा दिया जो जन्म से 75% दिव्यांग की श्रेणी में आता है,यह शासकीय अधिकारी,कर्मचारियों की स्थानान्तरण नीति के विरुद्ध है! जिसके बाद भी जनजाति कार्य विभाग में बैठे अधिकारी भी आंखें मूंद कर नियम विरुद्ध स्थानांतरण सूची आदेश जारी कर दिया।ये सब नियम विरुद्ध कार्य सत्ता पक्ष के अधूरिये नेताओं के कारनामे है क्योंकि दिव्यांग शिक्षक रामचंद्र भूरिया का पिछली बार 2021 में भी ट्रांसफर सूची में नाम शामिल करवा दिया था जिसके बाद शिक्षक रामचंद्र भूरिया हाई कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले आए थे।इस बार शिक्षक रामचंद्र भूरिया ने अपना स्थानांतरण रूकवाने के लिए जनसुनवाई में कलेक्टर मेडम से गुहार लगाई है।
यहां आपको बता दें 2021 में सत्ता पक्ष नेतानगरी ने 2021 में खवासा क्षैत्र के ऐसे कई शिक्षकों को दुर्भावनावश ट्रांसफर कर परेशान किये थे और कई शिक्षक हाई कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले आए थे।
जिसका खामियाजा पार्टी को पिछले साल पंचायत चुनाव में और इस बार ज़िला पंचायत उपचुनाव में भी भुगतना पड़ा है।
बाकी अगले अंक में पढ़िए अधूरिये नेताओं की पुरी कहानी सिर्फ वॉइस ऑफ झाबुआ मे सुनिल डामर की कलम से…!