USS समान नागरिकता कानून का आलीराजपुर जिले मे हूआ विरोध भील सेना संगठन ने कलेक्टर कार्यालय पहूचकर तहसीलदार को राष्ट्रपति के नाम सोपा ज्ञापन
ये कानून आदिवासीयो के हक अधिकारो को खत्म करने वाला कानून है । ÷ रमेश बघेल प्रदेश अध्यक्ष भील सेना संगठन

वॉइस ऑफ झाबुआ।
आलीराजपुर ÷देश मे समान नागरिकता कानून का विरोध आदिवासी बाहुल्य जिले आलीराजपुर मे देखने को मिला जहा भील सेना संगठन ने संस्थापक शंकर बामनिया प्रदेश अध्यक्ष रमेश बघेल जिलाध्यक्ष चतरसिंह मंडलोई के नेतृत्व मे कलेक्टर कार्यालय पहूचकर एक ज्ञापन राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार अजय पाठक को दिया ओर देश मे समान नागरिकता कानून लागू करने का विरोध भी किया भील सेना संगठन संस्थापक शंकर बामनिया ने कहा की देश मे समान नागरिकता कानून लागू होने से आदिवासियो के जो हक अधिकार है वो खत्म हो जाएगे जिसका हम विरोध करते है भील सेना संगठन देश की महामहिम राष्ट्रपति महोदया से मांग करते हुए कहा की समान नागरिकता कानून को देश मे लागू नही किया जाए वही भील सेना संगठन ने आज विरोध स्वरूप पूरे प्रदेश मे एक साथ ज्ञापन देकर विरोध प्रदर्शन किया
क्या है ज्ञापन मे
आदिवासियों, अनुसूचित जनजातियों के रीति रिवाज परंपरा, अलग विवाह, उत्तराधिकार कानून तथा इसी की वजह से प्राप्त संविधान के अनुच्छेद 13 3 के के अनुपालन, संविधान बनाने वालों के द्वारा संवैधानिक विधि, सारवान प्रश्न निहित, (integral sceme), संविधान पूर्व करार, संधि [ अनुच्छेद 133 के, 372 (1)] का ध्यान रखते हुए संविधान के अनुच्छेद 44 में लिखित राज्य के नीति निर्देशक तत्व के अनुसार समान नागरिक संहिता का देश भर के अनुसूचित क्षेत्र, अनुसूचित जनजाति, विस्थापित अनुसूचित जनजाति और प्रवासित( migrated ) आदिवासियों पर लागू न कर संवैधानिक संकट खड़ी न करने हेतु
संविधान के लागू होने 26 जनवरी 1950 के साथ ही अनुच्छेद 1 में 4 राज्यक्षेत्र विभाजन क्रमश: Part a state order, Part B state order, Part C state order, Part D state order के रूप में सामान्य राज्य तथा Scheduled area part A State order 1950 के रूप में ब्रिटिश इंडिया तथा ट्राइबल एरिया के अंतर्गत, तथा Scheduled area part B stated order के रूप में राजस्थान सहित अन्य राज्यों के स्वतंत्र आदिवासी क्षेत्रों को पांचवी अनुसूचित क्षेत्र/ आदिवासी क्षेत्र निर्धारण किया गया। [According to Indian Independence act section 7abic and government of India act section 311] देश भर के लगभग 500+ से अधिक आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजातियों के रूप में संविधान अनुसूचित जनजाति आदेश 1950 के तहत तथा अनुच्छेद 342, 366(25) के तहत अधिसूचित किया गया, जिसको अधिसूचित करने की शक्ति राष्ट्रपति महोदय को है जिसको लोकुर कमेटी के माध्यम से पांच विशेषताओं की गणना से अनुसूचित जनजाति निर्धारण करने का अधिकार बना दिया की दुरुपयोग किया गया है। लोकुर कमेटी के माध्यम से अनुसूचित जनजाति होने के पांच विशेषताओं में एक विशेषता अनूठी बोली जाति है आदिम
जनजाति गुण भी है। संविधान के अनुच्छेद 244 (1) के प्रावधान पांचवी अनुसूची प्रावधान के अनुसार कोई भी कानून अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों के रीति रिवाज परंपरा, शादी विवाह, उत्तराधिकार तथा गाँव की स्थापना पर हस्तक्षेप नहीं करेगा।सुप्रीम कोर्ट के समता बनाम आंध्र प्रदेश 1997 जजमेंट अनुसार Object of 5th Schedule is to preserve tribal autonomy..
महाशय 22वें ला कमीशन ने एक समान नागरिक संहिता / यूनिफॉर्म सिविल कोड फोट लागू करने या ना लागू करने हेतु आपत्ति या सहमति मांगे थे, जिस पर हम देशभर के आदिवासी समुदाय को शक के साथ में डर भी है कि अन्य धर्म/जाति के पर्सनल लॉ की सिविल कोड की समानता के साथ ही हम देशभर के आदिवासी/अनुसूचित जनजातियों की कस्टमरी लॉ यानी हिंदू, मुस्लिम, ईसाई पर्सनल लॉ से विपरीत शादी उत्तराधिकार आदि के अलग कानून रीति रिवाज परंपरा के अनुसार कस्टमरी लॉ को समाप्त कर एक समान नागरिक संहिता हम पर भी लागू किया जाएगा।चुंकि संविधान में अनुसूचित जनजाति का स्टेटस हम आदिवासियों के अलग रीति रिवाज, परंपरा, शादी विवाह, जन्म मृत्यु संस्कार, उत्तराधिकार तथा गांव की अलग व्यवस्था के तहत प्राप्त है, जिसको संविधान के अनुच्छेद 13(3) के भी मान्यता देती है। ( सुप्रीम कोर्ट का मधु किश्वर बनाम बिहार राज्य 1996) एक समान नागरिक संहिता / यूनिफॉर्म सिविल कोड हम देशभर के अनुसूचित जनजातियों पर लागू होने के साथ ही संविधान में अधिसूचित हमारी अनुसूचित जनजाति यानी कि ST का स्टेटस समाप्त हो जाएगा और चुंकि जल, जंगल, जमीन खनिज आदि पर आए सुप्रीम कोर्ट के कई तरह के जजमेंट (समता बनाम आंध्र प्रदेश 1997, पी रम्मी रेड्डी जजमेंट 1988 आदि), देशभर में लागू जमीन के कानून टेनेंसी एक्ट और रिवेन्यू कोड में एसटी STऔर एमसी SC के जमीन के विशेषाधिकार वानी एसटी की जमीन एसटी को ही बिकेगी तथा एमसी की जमीन एससी को ही बिकेगी यह भी समाप्त हो जाएगा।
संविधान के तहत अनुच्छेद 244 (1) के प्रावधान पांचवी अनुसूची में प्राप्त विशेषाधिकार अलग प्रशासन व्यवस्था, जहां पर संविधान के होते हुए भी 5वीं अनुसूची प्रावधान के पैरा दो में अनुसूचित क्षेत्र में कार्यपालक मजिस्ट्रेट का प्रावधान हैDistrict Act 1874, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1919 सेक्शन 52A, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 सेक्शन 91, 92 के तहत वर्तमान तक चली आ रही है जिसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है, कार्यपालक मजिस्ट्रेट की जगह जुडिशल मजिस्ट्रेट अनुसूचित क्षेत्र में असंवैधानिक तरीके से बिठाए जा रहे हैं।ऐसे में महाशय यदि यह मान लिया जाए की दुविधा में पड़े हम आदिवासियों को दिग्भ्रमित किया जाए कि एक समान नागरिक संहिता हिंदू, मुस्लिम, ईसाई पर्सनल लॉ को मानने वाले लोगों पर ही लागू होगा, ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 244(1) के प्रावधान पांचवी प्रावधान के तहत क्षेत्र में कार्यपालक मजिस्ट्रेट की जगह जुडिशल मजिस्ट्रेट आपराधिक मामले की सुनवाई करके आदिवासियों को संविधान विरुद्ध जेलों में डाला जा रहा है, ऐसे में यदि वृनिफॉर्म सिविल कोड अन्य जाति और धर्म के ऊपर लागू करने की अधिसूचना जारी होने कि स्थिति में भी यदि अलग से यह ना लिख दिया गया हो की यूनिफॉर्म सिविल कोड देश भर के आदिवासी/अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होगा, तो अनुसूचित जनजातियों के एसटी के स्टेटस पर खतरा है, जल, जंगल, जमीन, खनिज पर खतरा है, पांचवी अनुसूची पर खतरा है, साथ ही साथ संविधान के अनुच्छेद 334 के तहत लोकसभा और विधानसभा में MLA, MP अनुसूचित जनजाति आरक्षण का प्रावधान है, वह भी एसटी के स्टेटस खत्म होने के साथ में ही आरक्षण भी समाप्त हो जाएगा। इसलिए एकसमान नागरिक संहिता यूनिफॉर्म सिविल कोड के अनुसूचित क्षेत्र, अनुसूचित जनजाति, आदिवासी, विस्थापित आदिवासी, प्रवासित आदिवासियों पर लागू न हो,चूंकि लोकतंत्र का हिस्सा होने के कारण संविधान का अनुच्छेद 13(2) हमें शक्ति देता है। कि इस कोड का हम लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करें।महाशय, इस कानून के लागू होने से संवैधानिक संकट भी उत्पन्न हो सकता है, चूंकि सुप्रीम कोर्ट के समता जजमेंट 1997 के अनुसार पांचवी अनुसूची integral sceme है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने केशवानंद भारती जजमेंट 1973 जजमेंट में पांचवी अनुसूची को संविधान के अंदर संविधान कहा है, अत आप से निवेदन है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रो मे इस कानून को लागू ना करे इस दोरान भील सेना संगठन के कार्यकर्ताओ ने कलेक्टर कार्यालय पहूचकर विरोध स्वरूप ज्ञापन सोपा
ये रहे मौजूद
चतरसिंह मण्डलोई सारिंग बामनिया केनू भूरिया सजय भूरिया सूनिल मेढा पर्वत बामनिया दिनेश पचाया विरेन्द्र वसूनिया महेश बामनिया प्रकाश मेहडा राजेश कटारिया सूनील मेहडा निर्भय सिंह चौहान दिलीप भिंडे शूभला चोहान राजेश भूरिया सदिप डावर सचिन कटारिया रणजीत पचाया ,गुमान उपसरपच मानकर भाई प्रदीप मेहडा रमेश पचाया ,देवल निकेश सूरेश जोखिम सिह मेहडा अलपश मेहडा रोनक अजय सुनील मंत्री विनय खराडी देवल गणावा मोती सिंह सिंगाड निलेश सरपंच हरीश बामनिया, रोहित अजनार, विकाश अजनार अर्जुन सिगाड सुभाष अजनार बापू अजनार युवराज अजनार , सहित भील सेना संगठन के कार्यकर्ता उपस्थित थे