
वॉइस ऑफ़ झाबुआ सुनील खोड़े
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पेटलावद। उठ चंदा बस एक ही धंधा की तर्ज पर इन दिनों 2 लोग अपने आप को पत्रकार बताते हुए अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं। और वह अपने आप को संगठन और एसोसिएशन का हवाला देकर अधिकारियों से सहयोग के स्वरूप 11 हजार 21 हजार और ₹31 हजार की राशि की मांग कर रहे हैं उल्लेखनीय है कि उक्त पूरे लेटर पैड पर कार्यक्रम स्थल का कोई अता पता नहीं और इस कार्यक्रम में बड़े-बड़े नेताओं के पद का जिक्र कर उनके नाम पर सभी कार्यालयों में पहुंच रहे हैं सबसे बड़ी बात इसमें यह है कि सहयोग लेने वाले महान पुरुषों के पास दो पहिया वाहन तक नहीं है बस द्वारा इनका आना जाना होता इस युग में इतने महान लोग कहां होंगे जिनके पास ना तो दो पहिया वाहन है और ना ही चार पहिया इंदौर और भोपाल से बस के द्वारा पेटलावद और झाबुआ की खाक छान रहे हैं और संगठन के नाम पर जमकर अवैध तरीके से वसूली की जा रही है ये पत्रकार ना तो पेटलावद के हैं ना ही झाबुआ जिले के इंदौर और भोपाल का बताकर अधिकारियों को कार्यक्रम में सहयोग देने की बात कर रहे हैं। आखिरकार भोपाल इंदौर छोड़कर झाबुआ जिले में ही क्यों सहयोग लेने आना पड़ा यह एक बड़ा सवाल है क्या भोपाल और इंदौर के अधिकारी और सहयोगी इन महान संगठन कर्ताओं का क्या सहयोग नहीं करते उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी फर्जी पत्रकारों का गिरोह पुलिस गिरफ्त में आ चुका है वह भी अपने आपको पत्रकार बता कर स्कूल हॉस्टलों से अवैध वसूली कर रहा थे जब पुलिस ने उन्हें पकड़ा तब पूरा खुलासा हुआ कि यह अवैध तरीके से पत्रकारों के नाम पर अवैध वसूली की जा रही थी जिले के सभी शासकीय अर्धशासकीय समाजसेवी संस्थाओं से *वॉइस ऑफ़ झाबुआ* अपील करता है कि यदि बाहर के लोग संगठन पत्रकार बताकर यदि अवैध उगाही करते हैं तो तत्काल स्थानीय पत्रकार को सूचना जरूर देवे ताकि ऐसे अवैध तरीके से संगठनों के नाम पर वसूली करने वाले वसूली बाजों को सबक सिखा सकें…