
थांदला। यह है हमारे आदिवासी क्षेत्रों के हाल सरकार हमारे राज्य की सड़कों को अमेरिका की सड़कों से बेहतर बताते हैं लेकिन हकीकत बिलकुल इसके विपरीत हम बात कर रहे हैं झाबुआ जिले के थांदला तहसील के एक छोटे से गांव बिजनिपाड़ा की । कहने को तो भारत को आज़ादी 15 अगस्त 1947 को मिल गई थी लेकिन मानो यह गांव आज भी गुलामी की जंज़ीरों मे आज भी जकड़ा हुआ है यह गांव एक तरफ रेलवे लाइन तो दूसरी ओर एक तालाब और माही नदी से घिरा हुआ है यहां जाने के लिए एक मात्र कच्चा और पथरीला रास्ता है जो बरसात के समय बंद हो जाता है यहाँ के कई बच्चे बामनिया (पेटलावद तहसील) मे पढ़ने जाते हैं गांव के लोगों को हाट बाजार और घर के जरुरी सामान खरीदने बामनिया आना पढता है शासन प्रशासन द्वारा दी जा रही योजनाओं का क्रियान्वयन इस गांव में शुन्य है यहाँ यदि कोई बीमार पढता है तो एम्बुलेंस वाले भी रोड देखकर आने से मना कर देते हैं मजबूरन मरीज को कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ता है कई बार शासन प्रशासन को समस्याओं से अवगत कराने के बाद भी इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और न ही समस्याओं का निराकरण किया गया।कुछ समय पूर्व गांव वासियों द्वारा जनसुनवाई के माध्यम से कलेक्टर महोदय को आवेदन दिया गया था परंतु कोई निराकरण आज तक नहीं किया गया। आज भी गांव वाले बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सभी गांव वालों ने मिलकर सामूहिक निर्णय लिया यदि इन समस्याओं का निराकरण जल्द ही नहीं होता है तो उग्र आंदोलन किया जायेगा।
मनोहर बारिया
जयस ब्लॉक अध्यक्ष
थांदला