
वॉइस ऑफ झाबुआ
कौन है ये कुलक्षणसिंह…?? जो भाजपा की लुटिया डुबो कर ही रहेगा… और भाजपाईयों की मेहनत पर पलीता फेर कर ही रहेगा… सुना है कुलक्षण सिंह ने प्रदेश भर के आदिवासी जिलों के अधिकारी परेशान है… क्योंकि ये कुलक्षणसिंह प्रदेश के मुखिया के नाम लेकर अधिकारी कर्मचारियों को परेशान कर रहा है… हर किसी से गांधी छापों की डिमांड कर रहा है… जो नही देता उसका तबादला करवा देता है… या फिर उसे परेशान करता है… ज्यादा दुर की नही जिले की ही जनचर्चा है कि पूर्व कलेक्टर महोदया से 3 सीआर की डिमांड की थी… डिमांड पुरी नही हुई तो महोदया को परेशान करने लगा… और नेताओं को लुगाईयों की तरह चुगली करने लगा… और करवा दिया तबादला… सुना है इसके बाद सहायक आयुक्त कुलक्षणसिंह की नजर गई और उसे भी परेशान करना चालु किया… और उससे भी गांधीछापों की मांग की… अब बात लाख पचास हजार की हो तो ठिक ये तो हर किसी अधिकारी से सीआर की मांग करता है… ऐसे ही सीआर के चक्कर में सहायक आयुक्त का भी तबादला करवा दिया… ये सिर्फ झाबुआ में ही नही पुरे प्रदेश भर के आदिवासी जिलों में हो रहा है और प्रदेश के मुखिया की आंखों में धुल झांकी जा रही है… इस वसुली से किसी ओर को नही भाजपा को ही नुकसान होगा। प्रदेश भर के आदिवासी जिलों में कुलक्षणसिंह का जमकर विरोध हो रहा है… और इससे भाजपा की छवि भी धुमिल होती नजर आ रही है… चलों कलेक्टर महोदया दुसरे वर्ग की थी लेकिन सहायक आयुक्त तो आादिवासी थे मतलब साफ है आदिवासी के हितों के लिये मुस्तेद किये गए कुलक्षणसिंह आदिवासियों को ही लुट रहे है या फिर भाजपा सरकार आदिवासियों की हितैशी है ही नही। अब भाजपाईयों को ही तय करना होगा कि आने वाले चुनाव में कुलक्षण जैसे लोगों को दरकिनार करें अन्यथा भाजपा की हार पक्की है।
नोट- इसे कोई अपने ऊपर ना ले ये सूत्रों ओआरक ज़िले की जनचर्चा पर आधारित है!