
वॉइस ऑफ़ झाबुआ सुनील डामर
एक तरफ जहां प्रदेश सरकार आदिवासी बहुल क्षेत्र के 89 ब्लाकों में पैसा एक्ट लागू करके ग्राम सभा को पावर देने की बात करती है और पैसा एक्ट से आदिवासीयों के विकास,संरक्षण के दावे किये जाते हैं। प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा की अनुमति के बिना शराब की नई दुकानें नही खुलेगा,और यदि किसी दुकान का स्थान परिवर्तन करना है तो ग्राम सभा की अनुमति लेनी होगी। ये अधिकार पेसा एक्ट में दिए हैं। आबकारी नीति में जो प्रावधान है उसमें कमी करने का अधिकार भी ग्राम सभा को दिया गया है।वहीं खवासा ग्राम पंचायत की अंग्रेजी शराब की दुकानें बिना ग्राम सभा की अनुमति के संचालित हो रही है।इसके टेंडर भी ब्लाक से हो गए जबकि पैसा एक्ट में सारे अधिकार ग्राम सभा को दिए गए हैं इसके बावजूद इसकी जानकारी न तो ग्राम सभा को दी गई और न ही पंचायत के जनप्रतिनिधि सरपंच,उप-सरपंच सचिव को,वही लोगो ने खवासा में बिक रही दारू दुकान के साथ ढाबे पर भी बिक रही हे ऐसा बोल कर खुल रही दारू की दुकान के पक्ष में हे।
जिसके संबंध में खवासा उप-सरपंच ने जिला आबकारी अधिकारी विकास वर्मा से बात के कुछ अंश-
उप सरपंच:-दुकान का नया टेंडर हुआ जिसकी जानकारी आपने पंचायत को नहीं दी??
आबकारी अधिकारी:-खवासा जो दुकान है वह थांदला ग्रुप की दुकान है और टेंडर हुआ है वह थांदला ग्रुप का हुआ है जिसकी जानकारी पोर्टल पर आनलाइन होती है।जिसकी विज्ञप्ति जारी होती है सबको पता है।
उप-सरपंच:-आपको भी पता है कि पेसा एक्ट लागू हो गया है तो ग्राम सभा की अनुमति के बिना यहां पर कुछ भी नहीं हो सकता। फिर आपने विदेशी शराब की दुकान डलवाने का प्रस्ताव कैसे किया?
आबकारी अधिकारी:-पेसा एक्ट में ये नहीं है जिन जगह पर जहां ग्राम पंचायत में नई दुकान प्रस्तावित होती है वहां ग्राम पंचायत के अनुमोदन कि जरुरत होती है।ये तो पहले से दुकान थी।
उप-सरपंच:-हमारे गांव में हमको दुकान है नहीं चाहिए तो फिर क्यों लगा रहे??
आबकारी अधिकारी:-आप उसकी शिकायत, विरोध कर दीजिए।
उप-सरपंच:-बिलकुल हम विरोध करेंगे और हमारे गांव में हमको दुकान की जरूरत नही है और लगने भी नी देंगे किसी भी सूरत में।
आबकारी अधिकारी:-जैसा भी आपको लगे आप स्वतंत्र है जो चाहे वो कर सकते हैं।
उप-सरपंच:-आपका बता रहे आप सर्वे करके गए तो आपने किस आधार पर सर्वे किया था? यहां किसी लोकल बाडी को पुछा था क्या?
आबकारी अधिकारी:-यहां का सर्वे केवल मैंने नहीं किया कि दुकान यहां-वहां डले,लाइसेंसी ने उसकी दुकान के लिए जगह देखी है और यह देखा कि आसपास कोई शैक्षणिक और धार्मिक संस्थान तो नहीं है और अगर है तो 100 मीटर की दूरी है या ज्यादा है या कम है वो देखना है।
उप-सरपंच:-लाइसेंसी ने भी कोई जवाबदेही,जो नियम कायदे फालो नही किया,ये फिर ग्राम पंचायत से अनुमति ली कि मैं यहां पर दुकान लगाना चाहता हूं..
आबकारी अधिकारी:-ये तो उसकी है उससे बात कीजिए ना लाइसेंसी अनुमति नहीं लेता है ग्राम पंचायत से तो उसमें हम क्या कर सकते हैं।
उप-सरपंच:-आपने भी डाक्यूमेंट नी मांगे की कौन-सी दुकान प्रस्तावित कर रहे और कौन सी जगह पर ये डाक्यूमेंट आपने भी नहीं मांगे?
आबकारी अधिकारी:-वो डाक्यूमेंट्र आज से नहीं कई सालों से चली आ रही है।
उप-सरपंच:-बदलाव नहीं हो सकता यूं?
आबकारी अधिकारी:-बदलाव आप शिकायत करोगे तो क्यों नहीं हो सकता?
उप-सरपंच-बिलकुल विरोध करेंगे आप भी विरोध केलिए तैयार रहना।
इनका कहना है
ग्राम पंचायत की बिना अनुमति और बिना प्रस्ताव ठहराव के शराब दुकान खोली गई हैं जो पूर्ण रूप से अवैध है एवं पेसा एक्ट का उल्लंघन है।हमे हमारे गांव को नशा मुक्त बनाना है शराब दुकान खवासा में नहीं खुलने देंगे।
मनोहर बारिया
उपसरपंच ग्राम पंचायत
खवासा
ना विधानसभा ना लोकसभा सबसे बड़ी ग्राम सभा,
ग्राम सभा की परमिशन के बिना शराब ठेका खोला गया है पेसा एक्ट का उल्लंघन किया है हम अवैध दुकान खवासा में नहीं लगने देंगे ।
बद्री डिंडोर
पेसा एक्ट अध्यक्ष
खवासा
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विदेशी शराब ने अनगिनत परिवारों की ज़िंदगी खराब कर रखी है ओर कर भी रही है दुर्घटना, विवाद,ओ और भी घिनौनी हरकत अपराध की जड़ ही शराब है इसका मध्यप्रदेश सरकार को आदिवासी क्षेत्रों से पूर्णतः प्रतिबंध करना चाहिए ताकी आदिवासी क्षेत्रों में विकास की बाधा न बन सके और बिना ग्राम सभा की अनुमति से इन दुकानों को खोलने का लाइसेंस तुरत निरस्त किया जाए !
जयस जिला कार्यकारी अध्यक्ष
बलवेंद्रसिंह वसुनिया
पैसा एक्ट में जो अधिकार दिए है उसके हिसाब से तो ग्राम सभा की अनुमति के बिना शराब ठेके नही खुल सकते इस पर प्रशासन को ध्यान देना होगा दुसरी बात झाबुआ जिले में हर ठेके से अवैध तरीके से जो शराब गांवों में परिवहन की जा रही है उस पर अविलंब रोक लगनी चाहिए कानून सिर्फ गरीबों के लिए ही नही है जो थोड़ा बहुत देशी शराब बेचते है उन पर तो कार्यवाही हो जाती है लेकिन आबकारी अधिकारियों की ओर जिला प्रशासन की आंखों के सामने से अवैध शराब परिवहन होती वो नही दिखती संगठन के कार्यकर्ता दिनेश कटारा के द्वारा आरटीआई से जानकारी निकाली गई तो सबसे ज्यादा शराब के नाम पर कार्यवाही आदिवासियो पर ही की गई है जबकि सभी शराब ले ठेके गैर आदिवासियो के है तो एफआईआर हमारे लोगो पर ही क्यों चोरों को बचाना गरीबों पर कार्यवाही करना ये काम आबकारी अमला बंद करे।
रमेश कटारा
जयस जिला अध्यक्ष झाबुआ