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किस बिल में छुपे है आदिवासी नेता…! धिक्कार है ऐसे आदिवासी नेता होने पर….! यहां आज भी हो रहा है आदिवासियोें के साथ बुरा बर्ताव..! क्यों हुआ बुजुर्ग के साथ छुवाछुत का बर्ताव..! बुजुर्ग का बस इतना दोष था कि वो दो वक्त की रोटी की जुगाड में बाजार सब्जी बेचने आया..!

किस बिल में छुपे है आदिवासी नेता…!

धिक्कार है ऐसे आदिवासी नेता होने पर….!

यहां आज भी हो रहा है आदिवासियोें के साथ बुरा बर्ताव..!

क्यों हुआ बुजुर्ग के साथ छुवाछुत का बर्ताव..!

बुजुर्ग का बस इतना दोष था कि वो दो वक्त की रोटी की जुगाड में बाजार सब्जी बेचने आया..!

वॉइस ऑफ झाबुआ। झाबुआ जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है यहां के पंच से लेकर सांसद तक जो नेता है वो आदिवासी ही है लेकिन किसी ने आदिवासियों के लिए कुछ नही किया सबके सब अपना पेट भरने में लगे हुए है किसी को अपने समाज की पडी ही नही है जिनका वोट लेकर ये नेता नेतागिरी कर रहे है ऐसे नेताओं को धिक्कार है जो अपने समाज के लिए खडे ही नही हो सकते है…?

कल की ही बात कर लो सोशल मीडिया पर एक बुजुर्ग का वीडियों वायरल हुआ… जिसमें एक महिला उसके साथ बुरा बर्ताव कर रही है… दो वक्त की रोटी की जुगाड में झाबुआ बाजार में सब्जी बेचने आया बुजुर्ग थांदला गेट के समीप इंडिया मेडिकल के पास अपनी पोटली लेकर बैठा… जगह भी ज्यादा घेरी हुई नही थी… मगर महिला बुजुर्ग से बुरा बर्ताव करने लगी… और मेडिकल का हवाला देकर उसे भगाने लगी.. यहां तक कि उसने बुजुर्ग की पोटली या फिर युं कहे थेली खींच कर एक ओर कर दी… और हटाने के बाद वहां झाडु लगाने लगी… सुत्रों की माने तो इस महिला ने चारों और अवैध कब्जा किए हुए है शीलत श्री गारमेट के पास… पान की दुकान के पास… और मेडिकल के सामने.. यहां से किसी आदिवासी को बैठने ही नही देती है… और उनके बुरा बर्ताव कर भगा देती है… सीएम हेल्प लाईन में शिकायत भी की गई थी मगर इस महिला पर न जाने क्यों नगर पालिका वाले मेहरबान है… एक दिन इसकी दुकान हटती है तो दुसरे दिन तुरंत लग जाती है… आये दिन इन तरह से ये आदिवासी ग्रामीणों से व्यवहार करती है… लेकिन इन आदिवासियों की सुध लेने वाला कोई नही है… झाबुआ नगर पालिका में अध्यक्ष आदिवासी है… झाबुआ विधायक आदिवासी है… सांसद आदिवासी है… सत्ता चलाने वाली सरकार का जिलाध्यक्ष भी आदिवासी है… मगर ये सब देखने के आदिवासी है… क्योंकि ये कभी आदिवासियों की लडाई ही नही लडते है… इन्हे तो बस अपनी दुकानदारी चलाने से फुर्सत मिले तो ये अपने लोगों की ओर ध्यान दे… जब चुनाव आयेगे तो इन्ही आदिवासियों से वोटों की भीख मांगेगे… अब आप ही देखिये एक आदिवासी बुजुर्ग के साथ वायरल वीडियो में किसी तरह का बर्ताव हो रहा है… अब देखना यह है कि ये नेता सिर्फ सोशल मीडिया पर ही विरोध दर्ज करवाते रहेगे या फिर इस अतिक्रमण को हटायेगे… कही दिखावे के लिए हटाये भी तो कितने दिनों तक… धिक्कार है ऐसे नेताओं पर जो अपने लोगों के लिए कुछ नही कर सकते… इस तरह से कितने लोगों के साथ हर रोज बर्ताव होता होगा… बुजुर्ग के साथ इस तरह होना पुरे आदिवासी समाज के लिए शर्म की बात है… उसका बस इतना ही दोष था कि वो दो वक्त की रोटी की जुगाड में बाजार में सब्जी बेचने आया था… और उसके साथ इस तरह का बर्ताव बडा नींदनिय है..! शर्म आनी चाहिए इन आदिवासी नेताओं को….!

मगर हाँ.. जयस ज़िला अध्यक्ष विजय ड़ामोर मामले की जानकारी मिलते ही तुरंत पहुँचे थे.. ओर विरोध भी किया.. कि इस तरह से आदिवासियों के साथ बर्ताव नही होना चाहिए।

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