Homeझाबुआक्या झोलाछापों के सामने आदिवासियों की किमत है सिर्फ 3 लाख....?

क्या झोलाछापों के सामने आदिवासियों की किमत है सिर्फ 3 लाख….?

 

 आपका भिया निकलेश डामोर

क्या सच में ये आदिवासी बाहुल्य जिला है…फिर भी यहां आदिवासी नेता ही आदिवासियों का कर रहे है शोषण….चंद रूपयों के खातिर आदिवासी नेता ही आदिवासियों का सौंदा करने में नही चुकते है…ऐसा ही सौदा एक आदिवासी नेता ने कर डाला…..जिले भर में झोलाछाप डाक्टरों का मकडजाल फैला हुआ है ये झोलाछाप डाॅक्टर गांव गांव में देखने को मिल सकते है,जो आदिवासी समाज के लोगों से मोटी रकम तो वसुल करते ही है साथ ही उनकी जान से खिलवाड करने में भी नही छुकते है। यहां बीएचएमएच की डिग्री किए हुए भी अपने को डाॅक्टर कहते है मगर नियम कायदों का पालन नही करते हे,उन्हे जिन दवाईयों का उपयोग नही करने के निर्देश है फिर भी वो नियम विरूद्ध अपनी पैथी छोड दुसरी पैथी में कार्य करते है। ऐसे में जिले भर में कई ग्रामीणजनों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में जिला कलेक्टर सोमेश मिश्रा द्वारा जिले में एक अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने एवं झोलाछापों द्वारा जो लोगों की जान से खिलावाड किया जा रहा है उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है कलेक्टर साहब द्वारा बनाई गई टिम उन्ही पर कार्रवाई कर रही है जो नियमों का पालन नही कर रहे है और जिन पर एफआईआर दर्ज भी की जा रही है मय प्रमाणों के साथ….मगर बौखलाएं इन झोलाछापों के नेता गातला ने जिला कलेक्टर व उनकी टिम की छवि धुमिल करने के लिए हर प्रयास कर लिये…मगर वो कहते है ना सांच को आंच नही…ऐसा ही कुछ कलेक्टर साहब व उनकी टीम के साथ हो रहा है क्योंकि वो चाहते है आदिवासी बाहुल्य जिले में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना…
जब छवि धुमिल न कर पाए तो झोलाछापों के नेता आदिवासी नेताजी के पास पहुंचे और नेताजी ने आदिवासी होते हुए भी आदिवासियों का 3 लाख में सौदा कर डाला… और झोलाछापों ले पहुंचे पेटलावद दौरे पर आए प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह चोहान के पास….वहां प्रशासन के खिलाफ इन झोलाछापों ने भरकस शिकायते की और यहां तक रिश्वत लेने का आरोप भी मढ दिया…मगर मामाजी सब जानते थे उन्होने भी कह डाला जो दोषी होगा उन पर कार्रवाई होगी…अब झोलाछाप नियम विरूद्ध ही अपनी क्लीनिक संचालित कर रहे है। जिला प्रशासन को अब और सख्त रूप अपनाना चाहिए ताकि जो ये फर्जी झुठी शिकायत कर रहे है उन पर डंडा जरूर चलना चाहिए… और शर्म आनी चाहिए उस आदिवासी नेता को जो आदिवासियों का सौदा कर बैठे… जिनके नाम पर ये वोट लेते है और अपनी रोटियां सेकते है… ऐसे में नेताजी ये सोच ले कि आने वाले चुनाव में आपकी दाल नी गलनी है… पहले मोदी जी की लहर थी अभी भी है पर जनता समझ गई है आप हो क्या…?
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