वॉइस ऑफ झाबुआ | खावासा
कहने को तो शासकीय उचित मूल्य की दुकानें केंद्र एवं राज्य सरकार की संयुक्त योजना के तहत संचालित की जाती हैं, ताकि गरीब और पात्र परिवारों को पारदर्शिता के साथ खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके। लेकिन जिले की कई राशन दुकानों पर नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। खावासा सहित जिले के कई क्षेत्रों से शिकायतें सामने आ रही हैं कि राशन वितरण के दौरान उपभोक्ताओं को रिटर्न स्लिप (रसीद/बिल) नहीं दी जाती। कई मामलों में पहले हितग्राहियों से ई-पीओएस मशीन पर अंगूठा लगवा लिया जाता है और बाद में राशन की मात्रा में बदलाव या कटौती की शिकायतें भी सामने आती हैं।
रसीद नहीं मिलने के कारण उपभोक्ताओं के पास इस बात का कोई प्रमाण नहीं रहता कि उन्हें कितना और कौन-सा खाद्यान्न मिला। ऐसे में यदि किसी प्रकार की गड़बड़ी होती है तो वे शिकायत करने में भी असमर्थ हो जाते हैं। यह स्थिति सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। गौरतलब है कि इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात में कोई विशेष सुधार दिखाई नहीं दे रहा। सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
मुख्य सवाल
– क्या प्रत्येक हितग्राही को राशन वितरण के बाद रसीद देना अनिवार्य नहीं है?
– यदि हाँ, तो कई दुकानों पर यह नियम क्यों नहीं अपनाया जा रहा?
– आखिर कब तक आदिवासी समाज और गरीब उपभोक्ता इस तरह की अनियमितताओं का शिकार होते रहेंगे?