आलीराजपुर संवाददाता
जोबट/आलीराजपुर। विधानसभा क्षेत्र जोबट की विधायक सेना महेश पटेल ने प्रदेश के लाखों शिक्षकों के हितों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाते हुए मुख्यमंत्री को विस्तृत पत्र प्रेषित किया है। पत्र में उन्होंने मध्यप्रदेश में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों पर लागू की जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विषय में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है।विधायक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक कार्यरत हैं, जिन्होंने विगत 20 से 25 वर्षों से अधिक समय तक शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दी हैं। इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय प्रचलित नियमों एवं विधिक प्रावधानों के अंतर्गत की गई थी। अपने दीर्घकालीन अनुभव, समर्पण एवं निरंतर प्रयासों के माध्यम से उन्होंने न केवल शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ किया है, बल्कि विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों में शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि इन शिक्षकों के अनुभव और योगदान के परिणामस्वरूप विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन में निरंतर प्रगति हुई है।

ऐसे में वर्तमान में TET की अनिवार्यता लागू किए जाने से इन अनुभवी शिक्षकों के समक्ष असमंजस, मानसिक दबाव एवं भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। विधायक सेना महेश पटेल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि इस विषय को लेकर देश के कुछ राज्यों द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जा चुकी है। इस संदर्भ में उन्होंने मध्यप्रदेश शासन से आग्रह किया है कि वह भी शिक्षकों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर सकारात्मक पहल करे तथा आवश्यकतानुसार सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर विचार करे। उन्होंने आगे कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करना राज्य सरकार की नैतिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारी है। शिक्षकों की भूमिका समाज निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए उनके अनुभव और योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विधायक ने यह भी अपेक्षा व्यक्त की है कि राज्य सरकार इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी और ऐसा निर्णय लेगी, जिससे शिक्षकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके तथा शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता भी बनी रहे।.इस पहल को प्रदेश के शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उनके भविष्य को लेकर उत्पन्न हो रही चिंताओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल की उम्मीद जताई जा रही है।