वॉइस ऑफ झाबुआ
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झाबुआ। आज का यह विशेष दिन हमारी उन करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के साहस, संयम और सामर्थ्य को समर्पित है, जो न केवल एक परिवार की धुरी हैं, बल्कि आधुनिक राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला भी हैं। एक समाज और राष्ट्र के रूप में हमारी प्रगति तभी सार्थक है, जब हमारी नारी शक्ति सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर हो। मुझे यह कहते हुए अत्यंत गर्व होता है कि आज की ‘नई पीढ़ी की नारी’ अपनी सीमाओं को तोड़कर अंतरिक्ष से लेकर सेना तक और खेल के मैदान से लेकर कॉर्पोरेट जगत के ऊँचे शिखरों तक अपना परचम लहरा रही है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आज महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
“नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास-रजत-नग पगतल में।”
आइए, इस अवसर पर हम सब मिलकर एक ऐसे समावेशी समाज के निर्माण का संकल्प लें, जहाँ लिंग के आधार पर कोई भेदभाव न हो और हर बेटी को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर मिले। जब नारी का सम्मान होगा, तभी राष्ट्र का सर्वांगीण उत्थान संभव है। मैं भारत की प्रगति में योगदान दे रही प्रत्येक महिला के जज्बे को नमन करती हूँ और उनके उज्ज्वल एवं सुखद भविष्य की कामना करती हूँ।