समाचार, पारा।
मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले की साहित्यकार, कवयित्री एवं लेखिका मुक्ति भंडारी ‘ममता’ को साहित्य जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत रत्न अटल सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें 25 दिसंबर को लखनऊ में आयोजित समारोह में प्रिंट मीडिया वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा प्रदान किया गया। मुक्ति भंडारी ‘ममता’ हिंदी साहित्य में एम.ए. हैं और उन्हें बचपन से ही लेखन का शौक रहा है। उनकी कविताएँ एवं लेख निरंतर विभिन्न पत्र–पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। साहित्य के क्षेत्र में वे एक सक्रिय एवं समर्पित रचनाकार के रूप में जानी जाती हैं। उनकी एक धार्मिक पुस्तक स्वप्रकाशित हो चुकी है। वहीं अनेक साझा संकलन पुस्तकों में उनकी रचनाएँ सम्मिलित हैं। काव्य दर्पण, परिधि – सशक्त नारीत्व की गाथा, मर्यादा पुरुषोत्तम राम, नमो नमः भारताय, शब्द सारथी, सुरभित सावन, प्रीत का पहला सावन, नमामि रामम्, शक्ति दो माँ एवं सिंदूर जैसी कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा शिक्षाप्रद बाल कहानियों सहित तस्वीरें बोलती हैं, स्वतंत्र भारतम्, काव्य प्रवाह और टिम-टिम करते तारे जैसे संकलन शीघ्र प्रकाशित होने जा रहे हैं।
महाकुंभ पत्रिका में उनके आलेख प्रकाशित हो चुके हैं, साथ ही कई प्रतिष्ठित पत्र–पत्रिकाओं में उनके लेख एवं कविताएँ नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती हैं। इससे पूर्व उन्हें ज्ञानोदय प्रतिभा सम्मान एवं वूमेन आइकन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त गृह लक्ष्मी पत्रिका के कवर पेज पर उनका साक्षात्कार भी प्रकाशित हुआ है।
सम्मान प्राप्ति पर मुक्ति भंडारी ‘ममता’ ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार को दिया और कहा कि परिवार के निरंतर सहयोग और समर्थन से ही वे साहित्य साधना को निरंतर आगे बढ़ा पा रही हैं।