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चैत्य परिपाटी पंरपरा अंतर्गत बालक अर्हम संघवी की बावन जिनालय से महावीर बाग तक निकाली गई यात्रा अर्हम संघवी एवं संघवी परिवार का श्री संघ एवं विभिन्न संस्थाओं ने किया बहुमान

झाबुआ। स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में 31 अक्टूबर, शुक्रवार सुबह चैत्य परिपाटी पंरपरा अंतर्गत बालक अर्हम संघवी की बावन जिनालय से महावीर बाग तक यात्रा निकाली गई। बालक अर्हम संघवी एवं संघवी परिवार का जैन श्वेतांबर श्री संघ एवं विभिन्न संस्थाओं ने आत्मीय अभिनंदन एवं बहुमान किया। साध्वी अनुभवदृष्टा श्रीजी मसा ने जिन शासन में चैत्य परिपाटी परंपरा के महत्व को प्रतिपादित किया। संघवी परिवार की ओर से सभी के लिए साधर्मी भक्ति (भोजन) का भी आयोजन रखा गया।

जानकारी देते हुए श्वेतांबर जैन श्री संघ मीडिया प्रभारी रिंकू रूनवाल ने बताया कि सर्वप्रथम श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में साध्वीश्री द्वारा समाजजनों को प्रवचन देने के पश्चात् चेत्यवंदन की विधि करवाई गई। बाद यहां से चेत्य परिपाटी की यात्रा सुबह करीब 9 बजे आरंभ हुई। यह यात्रा बैंड-बाजों के साथ निकाली गई। जिसमें आगे साध्वी रत्नरेखा श्रीजी मसा आदि ठाणा-3 द्वारा चलने के साथ बड़ी संख्या में समाज के श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। यह यात्रा लक्ष्मीबाई मार्ग, राजवाड़ा, श्री गौवर्धननाथ मंदिर तिराहा, आजाद चौक, बाबेल चौराहा, मेन बाजार, बस स्टैंड चौराहा, जिला चिकित्सालय मार्ग, चेतन्य मार्ग होते हुए दिलीप गेट स्थित महावीर बाग पहुंची। यात्रा में विशेष बग्घी में बालक अर्हम संघवी को बिठाया गया। जिनका जगह-जगह समाजजनों ने अभिनंदन किया। महावीर बाग पर साध्वी रत्नरेखा श्रीजी मसा आदि ठाणा द्वारा मंदिर में विराजित श्री महावीर स्वामी भगवान के दर्शन-वंदन करते हुए चेत्यवंदन की विधि सामूहिक रूप से संपन्न करवाई। बाद गुरूवंदन कर धर्म सभा प्रारंभ हुई। जिसमें साध्वी अनुभवदृष्टा श्रीजी ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में जिन शासन में चेत्य परिपाटी के महत्व को समझाया। आपने बताया कि पूर्यषण महापर्व में श्रावकों के अनिवार्य कर्तव्यों में चेत्य परिपाटी को भी अनिवार्य बताया गया है। जिसमें शहर के एक जिनालय से दूसरे जिनालय तक सामूहिक रूप से यात्रा निकालकर भगवान के दर्शन-वंदन करने का वर्णन है।

वर्ष में एक बार चेत्य परिपाटी का आयोजन जरूर करना चाहिए

उसी परंपरा का निर्वहन करते सुश्रावक सुनील एवं अर्पित संघवी ने बालक अर्हम संघवी के जन्मदिवस निमित्त यह सुंदर और अनुपम आयोजन किया। आपने बताया कि चैत्य परिपाटी की पंरपरा से आयोजक को अनंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसका उदाहरण देते हुए समझाया कि महाराजा संपरति को अपने पूर्व भव में चेत्य परिपाटी करने के कारण अपने अगले भव में महाराजा बनने का सौभाग्य मिला, इसलिए सभी को अपनी शक्ति अनुसार वर्ष में एक बार चेत्य परिपाटी का आयोजन आवश्यक रूप से करना चाहिए।

किया गया बहुमान

कार्यक्रम के समापन पर श्री जैन श्वेतांबर श्री संघ, श्री महावीर बाग ट्रस्ट, श्री तीर्थंद्र सूरी समिति, श्री विघ्नहरा ट्रस्ट, परिषद् परिवार सहित कई सस्थाओं ने बालक अर्हम संघवी का शाल-श्रीफल से बहुमान के साथ आयोजक सुनील संघवी परिवार का भी तिलक कर, मोतियों की माला एवं शाल श्री-फल भेंटकर बहुमान किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने दिया। संचालन श्री जैन श्वेतांबर मालवा महासंघ के प्रदेश संयोजक डॉ. यशवंत भंडारी ने किया एवं अंत में सभी के प्रति आभार सुनील संघवी ने माना।

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