दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ
अलीराजपुर जिले के ग्राम छकतला में कल फिर सस्ते इलाज की लालच में एक निजी क्लीनिक संचालक डॉक्टर के इलाज के दौरान आदिवासी ग्रामीण की मौत हो गई जिले में यह तीसरी मौत है ।।जिसकी जवाबदारी अब कौन लेगा किस विभाग की लापरवाही है यह कौन तय करेगा , किस्से जवाब मांगा जाए और कौन जवाब देगा ,क्या इसी तरह आदिवासी समाज के लोगो को एक के बाद एक इलाज के नाम पर मरने दिया जाए सवाल यही खत्म नही होता सवाल तो शुरू होते है ।।अब क्या इस सभी क्लीनिकों के संचालन की अनुमति शासन से या नहीं और और अगर है तो फिर क्लीनिकों पर अनुमति लगी हुई क्यों नहीं है और अगर नहीं है तो फिर यह किसकी अनुमति और किसकी दादागिरी से जिले के हर गांव कस्बों नगर और फलियों में चल रहे है ।।जिले में कोई आदिवासी नेता या आदिवासी संगठन के लोग नहीं है जो इसकी आवाज उठाएं या फिर चंदा मांग कर सिर्फ आदिवासी दिवसों पर लंबे लंबे भाषणों से लोगो को झूठा आश्वाशन देना ही उनका काम है या जिले के सभी आदिवासी नेताओं की अभी तक नींद नहीं खुली क्या आदिवासी समाज के लोग सिर्फ आपको वोट देकर नेता बनाने या फिर बड़े पदों पर भेजकर आपको सम्मान नहीं दिलाते । तो फिर उनकी समस्या सुनने क्यों कोई नहीं आता । सिर्फ यह घटना कुछ दिनों में समाचार पत्रों और पोर्टलों और न्यूज चैनलों में सुर्खियों बनकर रह जाएगी ।क्या किसी के आदेश की कोई गरिमा कोई वेल्यू नहीं क्या उसका पालन भी नहीं किया जा सकता ।।आज हमारे आदिवासी परिवार का एक ग्रामीण ग्राम रोशीया निवासी सुरतान बामनिया फिर किसी अनसीखे डॉक्टर या बिना अनुमति क्लीनिक संचालक का शिकार हो गया और अब आगे क्या ।।