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फर्जी बंगालियों डॉक्टरों के क्लीनिक लगातार खुलते जा रहे है जिला प्रशासन मौन। स्टेरॉइड जैसी केमिकल का उपयोग कर रहे है फर्जी डॉक्टर जो गंभीर है। एक बार इस केमिकल का उपयोग मानव शरीर में होने के बाद उसको सर्जन भी ठीक नहीं कर पाएगा। जनप्रतिनिधि और जिले के नेताओं इसकी गंभीरता को समझे इनको रोका नहीं गया तो दस साल बाद आपको वोट देने वाले लोग कम ही बचेंगे

दिलीप सिंह भूरिया अलीराजपुर ब्यूरो चीफ 

चंद्रशेखर आजाद नगर भाभरा जिले भर में एक बार फिर मौत की दुकानें सजने लग गई है जिला कलेक्टर से लेकर उनके अधीनस्थ हर कोई कर्मचारी और अधिकारी गहरी कार्यवाही के नाम पर गहरी नींद में चले गए है अचानक नानपुर में दो आदिवासी लोगों की मौत के बाद कुंभकरणीय नींद से जागा प्रशासन धीरे वापस कुंभकरण की तरह वापस गहरी नींद में जा रहा है लगातार गांवों गलियों और नगरों में फिर से मौत की दुकानें याने कि फर्जी डॉक्टरों और फर्जी बंगालियों की क्लीनिकों का लगातार खुलना जारी है विशेष सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि जिन क्लीनिकों को प्रशासन बिना डिग्रीधारी डॉक्टरों और फर्जी डॉक्टरों से संचालित होने पर भी कार्यवाही नहीं कर रहे है वो एक ऐसे केमिकल का उपयोग आदिवासी मरीजों पर कर रहे है जो तुरंत इलाज में असर करता है मरीज को अगर दर्ज और अन्य बीमारी है तो उसको स्टेरॉइड नामक केमिकल मिलाकर उनका इलाज किया जा रहा है ।जिससे मरीज तुरन्त अच्छा हो रहा है लेकिन भविष्य में उस केमिकल के बहुत ही गंभीर परिणाम होते है मरीज अगर वापस से बीमार होगा तो उसको कोई ठीक नहीं कर पाएगा । और इस केमिकल के इंजेक्शन का प्रयोग एम बी बी एस डॉक्टर या सिविल सर्जन की सलाह के बिना बिना किसी मापदंड के नहीं दिया जा सकता लेकिन आदिवासी क्षेत्रों में उसका उपयोग फर्जी बंगाली डॉक्टरों और अन्य फर्जी क्लीनिकों पर इसको धड्डले से बिना किसी मापदंड के आदिवासी मरीजों पर प्रयोग किया जा रहा है ।जिसके आगे गंभीर परिणाम मरीज को भुगतना पड़ेंगे मरीज दोबारा बीमार हुआ तो वो जल्दी से ठीक नहीं हो पाएगा और उसके इलाज में काफी रुपया आगे खर्च होगा जो आदिवासी गरीब व्यक्ति खर्च नहीं कर पाएगा ।जिला कलेक्टर को एक बार फिर से तुरंत आदेश के बिना इनपर कार्यवाही एक दिन एक साथ करवानी चाहिए ताकि यह भाग नहीं सके साथ ही इनके क्लीनिकों को तो बंद करना ही चाहिए और इनपर रिपोर्ट दर्ज होती है साथ ही इनको जो क्लीनिक और हॉस्पिटल खोलने के लिए मकान देते है उन मकान मालिकों पर भी रिपोर्ट दर्ज कर उनको भी जेल भेजना चाहिए ताकि भविष्य में जिले में कोई भी इनको मकान या दुकान ना दे क्योंकि उनको प्रशासन का डर रहे अगर इन पर कोई कार्यवाही हुई तो हम पर भी कार्यवाही होगी । और एक बात जिले के नेता और जनप्रतिनिधि एक बार फिर कार्यवाही के लिए शासन प्रशासन को निर्देश करो अगर इस प्रकार प्रतिबंधित दवाइयों और केमिकल का उपयोग होता रहेगा आदिवासी भाइयों पर तो आगे आपको दस बीस सालों में वोट देने वाले लोग नहीं मिलेंगे ।

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