वॉइस ऑफ़ झाबुआ
साधना मे सिद्धी का सौपान सदगुरू की अनुकम्पा का प्रसाद है जो साधक को सिद्वी से समाधि तक की उच्च स्थिति तक पहुँचाने का सामर्थ्य रखता है। किन्तु उसके लिये समर्पण की आवश्यकता है। बुधवार को उक्त भावमय भक्ति मे गुरू पुजन महोत्सव पर श्री राम जन्म भुमि श्रृष्टि निर्मोही अखाडा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सन्त श्री राधे राधे बाबा ने सत्संग मे साधक साधिकाओं के बीच व्यक्तव्य करते हुवे सनातन संस्कृति के जीवन मुल्यो को अक्षुण्य बनाने के लिये संकल्पित होने का पुरजोर आव्हान किया है। उन्होंने कहाँ कि गुरू शिष्य परम्परा हमारी अतित की धरोहर है हमारे देश में आश्रम शिक्षा के केन्द्र होते थे जहाँ शिक्षा और संस्कार से राजा दशरथ के नन्दन राम से मर्यादा पुरूषोत्तम राम बन कर वन्दनीय हो गये। भगवान कृष्ण धर्म की रक्षा के साथ योगेश्वर बन गये सुदामा सन्त बन गये। उन्होंने कहाँ कि कालान्तर में हमारी धर्म और संस्कृति पर डुबे आकान्ताओ के आघात के चलते आश्रम परम्परा विलोपित हो गई जिसके दुष्परिणाम आज हमारे सामने है।

जो गम्भीर चिन्ता का विषय है। जिसका ऋषि परम्परा आश्रम से उपजने वाली उर्जा से ही समाधान संभव है। इस दिशा में संतो के प्रयास निरन्तर जारी है। और संतो की इसी संकल्प शक्ति से भारत अपनी खोई हुई धरोहर विश्वगुरू भारत के संकल्प की सार्थक परिणीती होगी। इसके लिये सभी सनातन धर्मानुरागीयो को अपने सद्गुरू की बताई साधना के पथ पर चलते हुवे जीवन में ज्ञान का आलोक हमे आत्मचिंतन मनन से आत्म कल्याण के लक्ष्य को साधते हुवे अपने राष्ट्र के अतीत के गौरव की बहाली में सहभागी बनेगा । उन्होंने कहाँ कि गुरू से कपट मित्र से चोरी के हो निर्धन के हो कोडी। अतः हमे गुरू की सेवा निष्कपट भाव से करना चाहिये तब ही उनकी कृपा बरसती है। हम संकल्प ले अपनी परम्पराओं के संवर्धन सरंक्षण का अपने अनादिकाल का यह परम्परा हमारे सदगुरू की ख्याती रही है। गुरू जिसपर कृपा करे उस पर कृपा बनी रहती है। श्रद्धा और भक्ति के अपमान करने वालो को भगवान भी नहीं बचा पाते है। भगवान शंकर भी गुरू परम्परा का सम्मान करते है। गुरु कृपा से कौआ भी कागभसुण्डी हो गये और तीनो लोको मे श्रेष्ठ कथाकार बन गये और जगत पुज्य हो गये। माया जीव क्या है यह सवाल जब गरूड ने कागभसुंडी से पुछा तो उन्होंने अपने उपदेश में कहाँ भक्ति मे रस पैदा करना है तो ज्ञानरूपी गुरू की शरण लेना पढेगी उन्होंने कहाँ गुण की सीडी पर पैर रखने पर ही निर्गुण समझ मे आएगा। इस गुरू पुजन महोत्सव मे वाद्ययंत्रो की थाप पर भक्ति गीतों और करवल ध्वनियों के बीच उपस्थित आबालबद्ध नर नारी मंत्र मुगध हो चले थे।

इस अवसर पर सद्गुरू सन्त श्री राधे राधे बाबा की उपस्थिति में साधक साधिकाओं मे शौभाराम जी पाटीदार मधुसुदन जी व्यास, हितेश शर्मा, अशोक जी बसेर मोतीसिंह नायक रमेश जी टेलर, मुकेश जी परमार, कन्हैलाल जी प्रजापति, किशोर नायक, जगदीश जी पाटीदार, राजेश जी वर्मा, पंकज जी गुर्जर, देविलाल जी वर्मा, मुकेश जी गुर्जर, मदन जी पंचाल सुभाश जी पंचाल, रमेश जी पंचाल, राम सोनी एवं अल्का जी बसेर सुनिता जी शर्मा, श्वेता जी वर्मा, जानीबेन पाटीदार, गुड्डी जी पंचाल, रोहिता जी पंचाल एवं मनीशा जी पंचाल सहित बडी संख्या मे मेघनगर और आसपास के श्रद्धालुओ ने भक्त भाव के बीच अपने सदगुरू का पुजन किया। सत्संग समारोह का संचालन लोकेन्द्र शर्मा एडव्होकेट कर रहे थें।