झाबुआ। ऐसा लगता है हर कोई इस आदिवासी बाहुल्य जिले को लुटने ही आता है… चाहे वो नेता हो या फिर अधिकारी… अब ये सुनने में आ रहा है… जिले के प्रभारी मंत्री के रूप में कुंवर विजय शाह का नाम घोषित होते ही… बिछौलिये… या फिर यूं कहे दलाल एक दम सक्रिय नजर आ रहे है… इनकी सबसे पहले नजर छात्रावासों कन्या परिसरों और स्वास्थ्य विभाग पर है… जो अधिकारियों पर प्रभारीमंत्री जी का नाम लेकर दबाव बना रहे है… लगता है जिसकी मंत्रीजी को खबर है ही नही… क्योकि इन दलालो से साथ अधिकारियों की भी मिली भगत है… हाल ही में सुनने में आया था कुछ दलाल मंत्री जी का नाम लेकर कन्या परिसरों में सप्लाय को लेकर पहुंचे थे… तो अधीक्षकों पर सामग्री खरीदी का दबाव बना रहे थे… लेकिन अधीक्षक समझदार है… उन्होने भी पल्ला झाड लिया… और सुना है… इस बार ऐसे दलाल छात्रावासों और परिसरों के आसपास भी नजर आये तो उनकी जमकर धुलाई भी होने वाली है…।
खैर स्वास्थ्य विभाग के भी कुछ ऐसे ही हाल है यहां भी प्रभारी मंत्रीजी का नाम लेने वाले दलाल हावी है… वो भी इसलिए क्योकि यहां के अधिकारी व कर्मचारी सबसे भ्रष्ट है… यहां के सीएमएचओ साहब जो पहले सिविल सर्जन के पद पर थे… उनके कार्यकाल में एक ही दिवार को तीन बार पोत दिया गया… रिपेरिंग के नाम पर बिल लगे… कुछ कर्मचारियों की तो ऑडियों भी सौदेबाजी करते हुए वायरल हो गई… जो दलाल के संपर्क में आते ही प्रभारी मंत्री के साथ साथ कमीशन को भी बदनाम करने लगे… और अपनी जेब गर्म करने के चक्कर में कागजों में ऐसी हेराफेरी कर रहे है कि प्रभारीमंत्री की छवि ऐसी धुमिल होगी की प्रभारी मंत्री जी कभी झाबुआ के दौरे पर नही आयेगे… खैर ये तो जनचर्चा है… लेकिन जिले वासी ये भी कह रहे है कि जब प्रभारीमंत्री इंदरसिंह परमार थे.. तब किसी को इस तरह से परेशान नही किया जाता था… उनके कार्यकाल में उनका नाम लेकर कोई दलाल ने किसी को डराया धमकाया नही….। लेकिन कुंवर विजय शाह के प्रभारी मंत्री बनते ही दलाल दादागिरी पर उतारू हो गए है.. भले ही प्रभारी मंत्रीजी को इस बारे में मालुम नही…!
सुश्री निर्मला भूरिया और नागरसिंह चौहान जी भी मंत्री है… प्रभारी मंत्री बनने से पहले वो मंत्री बने लेकिन उनके नाम से कोई दलाल डराते चमकाते नजर नही आया… किसी भी प्रकार से सप्लाय को लेकर दबाव नही बना… अधिकारियों की हेराफेरी पर भी नकेल कसी गई। लेकिन प्रभारीमत्री जी के बनते ही दलाल एक दम सक्रिय नजर आने ले है…। खैर ये तो जनचर्चा है… अब प्रभारी मंत्रीजी को इस बारे में पता न हो तो इस ओर जरूर ध्यान देना चाहिए… किसी उनकी छवि जिले में एक बार फिर धुमिल न हो जाये।