सुनिल डामर बामनिया
बामनिया के यशवंत डामर की बिमार बच्ची का इलाज करवाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बामनिया में डॉक्टर को दिखाकर दवाई ली। दवाई खाने के बाद जब बच्ची की तबीयत में सुधार के बजाय और बिगड़ने लगी। तब पिता ने कहा दवाई लेने से घबराहट होती है।परंतु जब लगातार 2 दिन तक दवाई लेने के बावजूद तबीयत में सुधार नहीं हुआ।तब पिता ने दवा को चेक किया। दवाई में एक्सपायरी डेट देख पिता के होश उड़ गए।

यशवंत डामर ने जानकारी देते हुए बताया कि मेरी बच्ची की तबीयत खराब होने पर मैंने उसको बामनिया स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर को बताया।वहां से दवाई भी ली।जब बच्चे की तबीयत और ज्यादा बिगड़ी।मैंने दवाई चेक की तो वह एक्सपायरी डेट की है।तब मैंने उसको लेकर पेटलावद निजी अस्पताल में बच्ची का इलाज करवाया।
जब मैं वापस सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों को बोला कि आपने मुझे और अन्य मरीजों को खराब हो चुकी दवाइयां दे रहे हो। वहां पर ओपीडी मौजूद कर्मचारियों ने फिर सभी एक्सपायरी दवाइयां को डब्बे में डालकर फेंक दी। साथ में बताया कि आगे से ही जैसी दवाई आई हमने वैसी ही जमा दी।