आपका भियां निकलेश डामोर
झाबुआ कलेक्टर महोदया एसपी साहब न काला हुं न काले कारनामें करता हुं… बात सीधी सीधी और पते की बता रिया हुं यहां कुकुरमुत्तों की तरह पत्रकार पैदा हो गिये है… जिनकों थाना प्रभारी एक शराब की बोतल न दे तो खबर लगा देते है और अधिकारी गाडी में डीजल न भरवाएं तो यहां खबर बन जाती है… यहां कुछ ऐसे दलाल व चापलुस किस्म के भी कलमकार है जो आपसे मीठी मीठी बात कर फोटो खिचवा लेंगे और कहेंगे कलेक्टर मेडम और एसपी साहब से अपने अच्छे संबंध है ध्यान रखना क्या काम करवाना है बता देना.. इस किस्म के कलमकार कार्यालय कार्यालय घुमते नजर आयेंगे… अब आते है सप्लायर, धंधेबाज जो अपने कामों के लिए कलमकार बन गए है वो भी इसलिए कि उनके काले कारनामें दबें रहें। धंधेबाज तो उससे भी बडे वाले है जो अपने धंधों को बचाने और अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए खबरें बनाकर अपने काम निकलवाते है।
कलेक्टर महोदाया और एसपी साहब गौर किजीएगा… इनसे बच कर रहना भी जरूरी है.. ऐसे कलमकारों की वजह से ही धरातल पर काम करने वाले और रजिस्टर्ड कलमकारों की छवि धुमिल हो गई है। ऐसे कलमकारों पर नकेल कसना जरूरी है कोई भी आया और पत्रकार होने का तमगा लेकर आ गया… ऐसे में इस ओर ध्यान देते हुए सबसे पहले आने वाले चापलुस कलमकारों रजिस्टेªशन चेक किया जाये… सबसे जरूरी होता है आरएनआई इसकी जांच की जाये… फलाना पोर्टल और ढिमका यू टयूब होने से कुछ नही होता… सरकार के नियम अनुसार महत्वपुर्ण होता है आरएनआई ये जरूरी है… और जिनके पास ये नही है ये ही आपके आगे पीछे चापलुसी करते नजर आयेगे… चाहे थाना चौकी हो या फिर कोई विभाग… अब निर्णय आपकों लेना होगा… एक बार उज्जैन में कार्रवाई हुई ऐसे झाबुआ में भी कार्रवाई होना नितांत आवश्यक है। आगे आपकी मर्जी… क्योंकि यहां हित पुरे न होने से विरोध होता है और संगठन बन जाते है और हित पुरे हो जायेे तो संगठन टुट भी जाते है… जिले में ऐसे कई उदाहरण हो चुके है। अब जा रिया राम राम…!