झाबुआ। चंद दिनों में ही आचार संहिता लागु होने वाली है…. और कुकुरमुत्तों की तरह अब पत्रकार पैदा हो जायेंगे… फलाना ढिमका… चैनल… अखबार… और पोर्टल से… और से सुबह से कार्यालय कार्यालय घुमते नजर आयेंगे…. सबसे ज्यादा तो दलाल सक्रिय होंगे…. इसकी दलाली उसकी दलाली… सालों दिखते नही है… और चुनाव आते ही बरसाती मेंढक की तरह बहार आ जायेगे… कुछ लुगाईयों की कमाई खाने वाले पोर्टल संचालक भी सामने आयेगे… और एक दारू की बोतल के लिए कभी थाना प्रभारी तो कभी यातायात वाले… तो कभी सोसायटी वालों को एक बोतल के लिए चमकायेंगे…। कलेक्टर महोदया व पुलिस अधीक्षक महोदय आपके यहां जो जनसंपर्क अधिकारी है… वो किसी को भी गु्रप में जोड रहे है… आप लोगों से अनुरोध है… चुनाव आ गए है…. ऐसे में अब जो शासन द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों जिनके पास आरएनआई नम्बर हो उन्हें ही पत्रकार समझे… शासन की गाईडलाईन में सब कुछ स्पष्ट है… कोई भी पोर्टल, यू टयूब चैनल लेकर आया और उसे जोड देना हां तक उचित है… पीआरओ लेटर में जो आरएनआई नम्बर या फिर शासन द्वारा मान्यता प्राप्त नम्बर दिया हो वो ही है… असल में पत्रकार… और हां अभी अभी चुनाव को देख जिन्होने अखबार और न्यूज चैनल लिए है…उन पर ध्यान दिया जाये कि उन्हें पत्रकारिता में कितना समय हुआ है… ऐसे कुुकुरमुत्तों की तरह पैदा होने वालें पत्रकारों की अभी बाढ आयेगी… और इन कुकुरमुत्तों की वजह से धरातल पर काम करने वाले और पंजीकृत पत्रकारों को परेशानी आती है… क्योंकि अभी देखना कार्यक्रमों और सभाओं व बैठकों में ये कुकुरमुत्ते ही आगे नजर आयेंगे…।
ऐसे दलालों और माफियाओं की वजह से पुरे पत्रकार बिरादरी को परेशानी होती है…. ये आगे ही आगे नजर आयेगे…. ऐसे में इन बार आप दोनों से निवेदन है कि आरएनआई व समयावधी देख कर ही जोडे… अन्यथा ऐसे पत्रकारों की वजह से धरातल पर काम करने वाले पत्रकार भी परेशान होंगे…!
कलेक्टर महोदया और पुलिस अधीक्षक महोदय जरा ध्यान दिजीए…! विधानसभा चुनाव नजदीक है अब कुकुरमुत्तों की तरह पत्रकार होंगे पैदा…! धरातल पर काम करने वाले और पंजीकृत ही असल में पत्रकार…! अब दलाल… सप्लायर… सटोरिये… माफिया धुमते नजर आयेंगे कार्यालय कार्यालय…!
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