
झाबुआ। आज आदिवासी अधिकार दिवस है… क्या सच में आदिवासियों को उनके अधिकारों का लाभ मिल रहा है… नही… भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र के आगे एक गरीब आदिवासी को सरकारी कार्यालयों के इतने चक्कर लगाने पडते है कि चक्कर लगाते लगाते उनके चप्पल घीस जाते है लेकिन उसका काम नही होता… चलो ठिक… हम बच्चों को मिलने वाली स्कूल ड्रेस की ही बात कर ले जो एनआरएलएम विभाग के समुहों के माध्यम से मिलनी चाहिए थी…।
जी हां एक बार भी कक्षा 1 से 4 व 6 ओर 7 को मिलने वाली स्कूल ड्रेस एक बार फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढती नजर आ रही है… वो भी इसलिए क्योंकि जिले का पुरा का पुरा प्रशासनिक तंत्र इस भ्रष्टाचार में शामिल है… ऐसा लगता है उन्हें तो बस राम नाम जपना पराया माल अपना की तर्ज पर काम करना आता है..।
लेकिन अब हिन्दु जनजाति संगठन मैदान में उतर गया है… और जो घटिया किस्म की स्कूल ड्रेस जो सप्लाय की जा रही है उसके विरोध में आवाज उठा रहे है… संगठन चाहता है कि जनजाति समाज के बच्चों को अच्छी किस्म की स्कूल ड्रेस पिछले वर्षो की तो मिले… इस वर्ष और भी दुसरा खेल हो सकता है… हिन्दुू जनजाति संगठन महामंत्री (मध्य भारत) कमलेश मावी जी का कहना है कि नएआरएलएम द्वारा घटिया किस्म की स्कूल ड्रेस स्कूलों में सप्लाय की जा रही है… कोई बडी है तो कोई छोटी… अभी से ही ड्रेस फटने लगी है…. ऐसे में अगर विभाग ने इस ओर ध्यान नही दिया तो हिन्दु जनजाति संगठन एनआरएलएम विभाग को घेराव कर धरना प्रदर्शन करेगा… अगर कुछ होता है तो उनकी जिम्मेदार प्रशासन की होगी… मावी का यह भी कहना है शिक्षकों से जब हमने बात की तो किसी भी प्रकार से ना तो नाप लिया और ना ही जानकारी दी गाड़ी आई और ड्रेस से भरे थैले डाल कर चली गई इस ड्रेस की ना कोई गुणवत्ता है ना ही सही से सिली हुई।
आखिर सचिन क्यों बौखला रहा है…
हिन्दु जनजाति संगठन के युवाओं द्वारा सचिन के घर का घेराव करने की पोस्ट डाली थी… वॉइस ऑफ झाबुआ ने भी लिखा था कि कोई सचिन है जो इस घटिया किस्म की स्कूल ड्रेस को सप्लाय कर रहा है… हमनें सिर्फ सुना था कि कोई सचिन है… लेकिन सुत्र बता रहे है कि कोई खवासा का सचिन विरोध के बाद बौखला गया और इधर उधर से फोन लगवा रहा है…. अगर घोटला नही किया तो बौखलाहट कैसी… और लोगों पर दबाव क्यों बनवाया जा रहा है… बाकि अगले अंक में….