रिंगनोद:- (योगेश गवरी)
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी का श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मान है, जो आगामी छह सितंबर (बुधवार) को मनाया जाएगा। इस बार जन्माष्टमी पर जयंती नामक विशिष्ट योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। वैष्णव संप्रदाय के उदय व्यापिनी रोहिणी मतावलंबी वैष्णव जन सात सितंबर को व्रत पर्व मनाएंगे।
ज्योतिष आचार्य गिरिराज व्यास द्वारा बताया गया कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी छह सितंबर की शाम 7.58 बजे लग रही जो सात सितंबर की शाम 7.52. बजे तक रहेगा
जन्माष्टमी छह सितंबर को, सजेगी झाकियां और गूंजेगी बचाई
उदय व्यापिनी रोहिणी मतावलंबी वैष्णवजन 7 सितंबर को मनाएंगे
अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र कर संयोग होने से छह सितंबर को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी।
फलदायक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव जन्माष्टमी और जयंती के भेद से दो प्रकार की होती है। भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी जन्माष्टमी के नाम से और अष्टमी यदि रोहिणी नक्षत्र से युक्त होती है तो जयंती नामक योग का निर्माण करती है। यह जयंती व्रत अन्य व्रत की अपेक्षा विशिष्ट फल प्रदान करने वाली होती हैं। भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी यदि रोहिणी नक्षत्र से युक्त होती है ती जयंती होती है। यह जयंती पापों का नाश करने वाली होती है।
जयंती योग में किशन कन्हैया का जन्मोत्सव
व्रत में तीन दिन मनेगा कान्हा का जन्मोत्सव
। भगवान कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर ब्रज में चा उल्लास है। मंदिरों में तैयारी चल रही है। तारणहार का जन्मोत्सव तीन दिन तक चलेगा। प्राचीन मंदिर ठाकुर श्रीदेव में जन्मोत्सव को मनाया जाएगा। जिस दिन अष्टमी लगती है, उसी दिन यहाँ जन्मोत्सव मनाया जाता है। श्री कृष्ण जन्मस्थान और अन्य मंदिरों में सात सितंबर को आयोजन होगा। सूर्य उदय में अष्टमी होने पर जन्मोत्सव मनाया जाएगा। नंदगांव मैं आठ सितंबर को जन्मोत्सव का आनंद होगा। यहां गोपद गणना (खुर गिनती) से यह आयोजन होता है। गौरतलब है कि धन के आठवें दिन कन्हैया का जन्मोत्सव मनाया जाता है। यह जानकारी ज्योतिष आचार्य शंकर लाल व्यास व गिरी राज व्यास के द्वारा दी गई