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जिंदगी भर जंगलों में रहने को मजबूर ,बेरोजगारी में जीवन जीने को मजबूर तब कोई नही आता

 

 

 

दिलीपसिंह भूरिया

आदिवासियो को, क्या समानता का अधिकार नहीं क्या वो इंसान नही इतिहास गवाह है आदिवादियों को ना राजाओं ने पसंद किया ना अन्य लोगो ने आदिवासी लोगो को शुद्र समझकर जंगलों में भेज दिया गया आदिवासी लोग ने अपनी जिंदगी में अपने पुरखों के सारे जीवन भर जल जंगल जमीन को सहेज कर रखा आदिवासी लोगो की वजह से आज जल जंगल जमीन का हिस्सा बचा है जहा अन्य जाती के लोगो ने बड़ी बड़ी इमारत तान दी भोग विलास के लिए लेकिन भोजन जंगलों से ही मिला है शुद्ध हवा पानी जंगलों की बदोलत प्राप्त हुवे है ।लेकिन आज दुनिया 21 वी सदी में प्रवेश कर गई है लेकिन आज भी आदिवासी समाज और समाज के लोग जिस भी प्रदेश और राज्य में निवास कर रहे है वहा आज भी कोई भी सरकार चाहे भाजपा हो या कांग्रेस बिजली, पानी ,शिक्षा , स्वास्थ्य ,रोजगार जैसे मूलभूत सुविधाओ के लिए आजादी के 75 वर्षो के बाद भी तरसते देखा जा सकता है लेकिन जितनी भी सरकार आई और चली गई लेकिन इनके पूर्ण विकाश करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जितनी भी राशि आदिवासियों के विकाश के लिए भेजी जाती सबमें बंदरबाट ही हुवा ।जिसके कारण आज भी पानी शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के लिए आदिवासी क्षेत्रों में सुविधाओ नही है ,है भी तो उट के मुंह में जीरे जैसा है ।जिले के आदिवासी क्षेत्रों के आदिवासी लोगो को रोजगार के लिए गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र ,और अन्य राज्यो में जाना पड़ता है ।जहा उनको रोजगार के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है वहा गावो में खुल्ले में खेतो में चोटी मोटी टपरिया या फिर प्लास्टिक की झोपड़ी बनाकर रहना पड़ता है जहा कई परेशानियां और सुरक्षा नही होती ।आज आदिवासी क्षेत्रों में देश का आधा जंगल आधा पानी और आधा खनिज होने के कारण जंगलों और जल जमीन की ओर माफिया और बड़े बड़े उद्योगपतियों की गिद्ध वाली नजरे आदिवासियों के पास और उनके आसपास की जल जंगल जमीन पर पद चुकी है ।।जिसको सहेजकर सदियों तक आदिवासी और आदिवासी समाज ने रखा है ।आदिवादियों के विकाश के लिए जो भी प्रयास किए गए है और जिस भाजपा कांग्रेस ने आदिवासी वोट का उपयोग कर उनके सांसद और विधायक एक एक हजार करोड़ की संपति के मालिक बन गए है ।लेकिन उसके रिश्तेदार और उनके ग्रह ग्राम की सड़के आज भी सुधारी नही गई ना आज भी उस क्षेत्र का विकाश नही हुवा है ।।।भाजपा कांग्रेस के नेताओ और सरकारों ने बड़े बड़े वादे कर आदिवासी जनता से वोट तो मांग लिए और राज्य भी वर्षों से किया लेकिन फिर भी उनके विकाश की बात करना इसमें और आदिवासी समाज के साथ किया एक धोका ही साबित हुवा है आगे जब भी चुनाव आते ही आदिवादो और बड़े बड़े राजनेता अपने चरणों में गिर पड़ कर वोट तो मांग लेते है लेकिन विकाश करने की बात आती है तब वह क्यों नही करते।

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