आटे में थोड़ा नमक तो चलता है इतना भी नहीं की रोटी पूरी खारी हो जाए..!
काम दो लाख से कम का और बिल 4 लाख का तो कैसे करेंगे सीएमओ साहब बिल पास..!
इस लिए तो हो रहा है शोसल मीडिया पर इतना बवाल.. !
झाबुआ। आपने आटे में नमक वाली कहावत तो सुनी होगी.. ऐसा ही कुछ नगर पालिका में सुनने को मिल रहा है.. यहाँ काम दो लाख से कम.. या सामग्री उपयोग में आई.. नगर पालिका में बिल 4 लाख के लगाये गए.. मामला है हैंड पंप साधारण का.. सूत्रों की माने तो जब सीएमओ मिलन पटेल साहब द्वारा बिलों की जाँच की गई.. तब जाकर पता चला की ये खेल तो निराला है.. बिल लगाने वाला रातोंरात लखपति बनने में लगा है.. इतने बड़े खेल के बिल भुगतान करने से सीएमओ साहब मना कर दिया
.. फिर क्या था.. बिल लगाने वाले ने सीएमओ साहब की छवि धूमिल करना चालू कर दी.. शोसल मीडिया पर पोस्ट डालना.. नपा में कर्मियों से बहस करना.. ये चालू कर दिया.. सूत्र ये भी बताते है इन महाशय का एक गुर्गा है जो है.. जो किसी हेडपंप के काम के लिए पाइप निकालता तो 5 है लेकिन लगाता दो ही है और कागजों में इंट्री 5 कि ही होती है.. ठेकेदार को तो ये मालूम ही नहीं पड़ा. कि खेल क्या हो रहा है.. जब बिलों का खेल हुआ तब ठेकेदार को भी पता चला.. ये खेल सभी 18 वॉर्डों में हुआ.. ये तो सीधे तोर पर जनता का हक डकारा जा रहा है. ये महाशय कोई और नहीं एक पार्षद के प्रतिनिधी है.. इस खेल में और कौन कौन है हम आपको बतायेंगे.. सूत्र बताते है इन्होंने लिंक रोड वाले मामले में भी ऐसा खेल खेल है.. ऐसे कई मामले है जो परत दर परत हम खोलने वाले है और जल्द ही आपको हम बिल भी बतायेंगे..
शोसल मीडिया पर पाखंड कर जनता की आँखों पर पट्टी बंधी जा रही है.. और एक ईमानदार सीएमओ की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है.. अगर ये भी नहीं कर पत्र है तो उपाध्यक्ष और राजस्व सभा पति पर लांचन लगाया जाता है.. ख़ैर हमें तो सूत्रों से ये पता चला.. नगर पालिका में क्या चल रहा है.. ये तो नगर पालिका वालें ही जाने.. लेकिन ऐसे लोगों के चेहरें जानता के सामने उजागर होना चाहिए.. ताकि जनता को भी पता चल सके आख़िर खेल क्या है.. उनके हक़ का पैसा कैसे डकारा जा रहा है..!
असल में सीएमओ साहब जो वाजिब बिल है उसका भुगतान करना चाह रहे है.. लेकिन अधिक राशि के चक्कर में सोशल मीडिया पर ये बवाल मचाया जा रहा है.. और इस खेल में बिना वजह ठेकेदार को फँसाया जा रहा.. सूत्रों की माने तो ये प्रतिनिधि अपने हिसाब से मोटी रकम के चक्कर में ये खेल खेलता है और बिना वजह ठेकेदार और सीएमओ साहब पर दबाव बनाता है.यहाँ तक ठेकेदार को भी मालूम नहीं होता है कि काम कहाँ हो रहा हे या फिर हुआ ही नहीं.. जब फाइल नगर पालिका पहुँचती है तब पता चलता है यहाँ कम हुआ।
आपने वो कहावत तो सुनी होगी ग़रीब की जोरू सब की भाभ ऐसा ही हाल ठेकेदारों का हो रहा है. पार्षद और षउनके प्रतिनिधि अनैतिक कामों और फर्जी बिल पास करने के लिए दबाव बनाते है।