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क्या “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” सिर्फ कागज़ों तक सीमित है..? क्या एस.पी साहब करेंगे कार्यवाही क्या निकलेगा मंचलो का जुलुस..? या सिर्फ बेटियों की रूरक्षा पर भाषण ही देती रहेगी सरकार.!

खवासा-रितिक परमार 

खवासा-आदिवासी समाज के लिए 9 अगस्त का दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है। विश्व आदिवासी दिवस को झाबुआ जिले के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। लेकिन खावसा में भी आदिवासी दिवस बाड़े हर्ष के साथ मनाया गया लेकिन उसके अगले दिन ही सामने आए एक कथित वीडियो ने इस पूरे आयोजन की व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में कथित तौर पर कुछ युवक एक युवती के साथ छेड़छाड़ ओर गली गलोच करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वीडियो बनाने वाले लोगों ने स्वयं ही इस घटना का वीडियो बनाया और बाद में उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि वीडियो में दिखाई दे रही घटना सही है, तो क्या आरोपियों को कानून का कोई डर नहीं था? सार्वजनिक आयोजन में महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के लिए पुलिस व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद ऐसी घटना सामने आना प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

शराब और हुड़दंग के बीच महिला सुरक्षा पर सवाल

आदिवासी दिवस जैसे सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाएं और युवतियां भी शामिल होती हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान कुछ लोगों ने शराब के नशे में हुड़दंग किया। यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो सवाल उठता है कि पुलिस और प्रशासन की निगरानी कितनी प्रभावी थी?

 

 

एसपी साहब से सीधे सवाल

झाबुआ एसपी साहब, सवाल यह है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही घटना की पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच की या नहीं?

-वीडियो में दिखाई दे रहे युवकों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी  – क्या ऐसे आयोजनों में महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मियों की व्यवस्था की गई थी?

“बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों की सफलता सिर्फ नारों और पोस्टरों से नहीं, बल्कि बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने से साबित होगी।

आदिवासी दिवस समाज की एकता, संस्कृति और गौरव का पर्व है। कुछ असामाजिक तत्वों की हरकतों से पूरे आदिवासी समाज की छवि धूमिल नहीं होनी चाहिए। ऐसे मामलों में पुलिस को निष्पक्ष और त्वरित जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

अब देखना यह है कि वायरल वीडियो पर पुलिस कब तक कार्रवाई करती है और जिम्मेदार लोगों पर कानून का शिकंजा कब कसता है?

वॉइस ऑफ़ झाबुआ ने भारत आदिवासी पार्टी के विधानसभा प्रभारी 

मनोहर बरिया सै बात की तो उन्होंने भी इस घटना की निंदा करते हुवे कहा की ऐसे लोगो पर सख्त कारवाही होनी चाहिए जो समाज का नाम धूमिल करने मै लगे हुवे है उन्होंने बायत की हमने आदिवासी दिवस पर निकलने वाले जुलुस को भी इसी लिए निरस्त किया की बाजार का माहौल ख़राब ना हो ओर कोई वाद विवाद ना को

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