वॉइस ऑफ झाबुआ
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पेटलावद। वन विभाग की सरकारी संपत्तियों के उपयोग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि पेटलावद वन विभाग के सरकारी क्वार्टर पर थांदला वन परिक्षेत्र में पदस्थ डिप्टी रेंजर तारसिंह भाभर का पिछले करीब दो वर्षों से कब्जा बना हुआ है। जबकि उनका तबादला काफी पहले पेटलावद से हो चुका है। ऐसे में विभागीय कर्मचारियों व लोगो के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर यह सरकारी क्वार्टर किसी अधिकारी की निजी संपत्ति है या वन विभाग की?
जानकारी के अनुसार तारसिंह भाभर का लगभग दो वर्ष पूर्व पेटलावद से स्थानांतरण हो चुका था। इसके बाद उन्होंने थांदला में अपनी सेवाएं शुरू कर दीं, लेकिन आरोप है कि आज तक उन्होंने पेटलावद स्थित विभागीय आवास खाली नहीं किया। इससे उन कर्मचारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है जिन्हें वर्तमान में सरकारी आवास की आवश्यकता है और वे मजबूरी में निजी मकानों में किराया देकर रह रहे हैं।
वन विभाग के कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर दबी जुबान से बताया कि सरकारी आवास किसी व्यक्ति विशेष की निजी संपत्ति नहीं होते, बल्कि पदस्थ अधिकारी या कर्मचारी की आवश्यकता के अनुसार उनका आवंटन किया जाता है। यदि स्थानांतरण के बाद भी कोई कर्मचारी वर्षों तक सरकारी आवास पर कब्जा बनाए रखता है तो इससे विभागीय नियमों की अनदेखी होती है और अन्य कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होते हैं। यदि समय पर क्वार्टर खाली कराया जाए तो वर्तमान में पदस्थ कर्मचारियों को सुविधा मिल सकती है। मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।
क्या बोले वन परिक्षेत्र अधिकारी…
थांदला वन परिक्षेत्र अधिकारी तोलाराम हटिला ने बताया कि “डिप्टी रेंजर तारसिंह भाभर करीब दो वर्ष पहले थांदला में जॉइन कर चुके हैं। उनकी वर्तमान पदस्थापना अमरगढ़ में है और वे प्रतिदिन अप-डाउन करते हैं।
हालांकि, पेटलावद स्थित सरकारी क्वार्टर अब तक खाली नहीं होने को लेकर विभागीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और सरकारी आवास को लेकर लागू नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है या नहीं।
अगले अंक में पढ़िए…मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के आदेश की धज्जियां उड़ाते रेंजर तोलाराम हटिला ओर डिप्टी रेंजर तारसिंह भाभर…. मुख्यालय छोड़ डेली अपडाउन आखिर क्यो ??