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झोसर पंचायत अघोषित ठेकेदार के भरोसे ? पंचायत भवन बनने से पहले ही चढ़ गया भ्रष्टाचार की भेंट, लाखो निकले काम की प्रगति विपरीत – क्या अघोषित ठेकेदार जितेंद्र आधी रोटी में ले रहा दाल ?

संवाददाता सुनील खोडे 

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पेटलावद — जनपद पंचायत पेटलावद की ग्राम पंचायत झोसर में 37 लाख 50 हजार रुपये की लागत से निर्माणाधीन पंचायत भवन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण कार्य में अनियमितता, गुणवत्ता में लापरवाही और लाखों रुपये के भुगतान के बावजूद कार्य की अपेक्षित प्रगति नहीं होने के आरोप सामने आए हैं। मामले में सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पंचायत का निर्माण कार्य नियमों के विपरीत एक अघोषित ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है? जानकारी के अनुसार पंचायत भवन का निर्माण कार्य 15 अगस्त 2025 को स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि निर्माण कार्य की वास्तविक प्रगति के विपरीत लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया, जिसमें बिना जीएसटी वाले बिल लगाए जाने की भी बात सामने आ रही है। वहीं मौके पर निर्माण की गति बेहद धीमी बताई जा रही है और जो कार्य हुआ है, उसकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य कांग्रेस नेता एवं अघोषित ठेकेदार जितेंद्र द्वारा कराया जा रहा है। जिसकी जानकारी फोन पर बातचीत के दौरान स्वयं जितेंद्र ने निर्माण कार्य कराने की बात स्वीकार की है, जिसकी रिकॉर्डिंग भी हमारे पास उपलब्ध है। ग्राम पंचायत झोसर में महिला सरपंच निर्वाचित हैं, लेकिन आरोप है कि पंचायत का संचालन उनके पति शैतान भूरिया द्वारा किया जा रहा है। जिनका एक दांत सोने का है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के पूर्व के कई निर्माण कार्य भी कथित रूप से इसी प्रकार अघोषित ठेकेदार के माध्यम से कराए गए हैं। निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि भवन की नींव को पर्याप्त मजबूती नहीं दी गई। कई स्थानों पर कॉलम जमीन के ऊपर से ही शुरू होते दिखाई दे रहे हैं। निर्माण एजेंसी द्वारा जमीन में पत्थर होने का हवाला दिया जा रहा है।

इस पूरे मामले में जनपद पंचायत के सीईओ गौरव जेन, पंचायत इंस्पेक्टर ज्ञानसिंह चौहान, संबंधित उपयंत्री गजराजसिंह अहीरवाल एवं सरपंच का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन किसी ने भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी से भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। या दो जिम्मेदारो की मिली भगत है या फिर सभी मिलकर शासन के रुपयों को पलीता लगा रहे है। अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए शासन की राशि के दुरुपयोग की भरपाई सुनिश्चित की जाए। अगली खबर में पढ़िए अघोषित ठेकेदार व कांग्रेस नेता जितेन्द्र गरीब आदिवासियों के नाबालिक बच्चो का भविष्य कर रहा बर्बाद, चलवा रहा गेती-फावड़े ….!

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